
कोलकाता, 19 फरवरी । पश्चिम बंगाल में दावा-आपत्ति सुनवाई के दौरान जमा किए गए मतदाता दस्तावेजों की जांच में अभी तक लगभग 20 लाख दस्तावेजों की पुनः सत्यापन प्रक्रिया लंबित है। ये दस्तावेज जिला मजिस्ट्रेटों, जो एक साथ जिला निर्वाचन अधिकारी भी हैं, द्वारा अभी तक पूरी तरह से जांचे नहीं गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश लंबित मामले “तार्किक विसंगतियों” की श्रेणी में आते हैं। चल रही सत्यापन प्रक्रिया के दौरान माइक्रो-ऑब्जर्वरों ने कई दस्तावेजों में असंगतियां पाई हैं, जिनमें कई प्रस्तुतियां भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त 13 पहचान दस्तावेजों से मेल नहीं खाती थीं। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों को संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को पुनः जांच के लिए भेजा गया है। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रक्रिया को जल्द पूरा करें और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
विलंब का एक और कारण यह है कि लगभग 1.14 लाख दस्तावेज अभी तक सिस्टम में अपलोड नहीं किए गए हैं। इसके कारण इन आवेदनों का सत्यापन शुरू ही नहीं हो पाया है। इस स्थिति को देखते हुए, 21 फरवरी की अंतिम समयसीमा को पूरा करना मुश्किल प्रतीत हो रहा है। संभावना जताई जा रही है कि सत्यापन की समयसीमा को फिर से बढ़ाया जा सकता है, जिससे अंतिम मतदाता सूची की प्रकाशन तिथि भी आगे खिसक सकती है।
वर्तमान में अंतिम निर्वाचन सूची 28 फरवरी को जारी करने की योजना है, जबकि पहले यह 14 फरवरी को जारी करने का प्रावधान था। इस बीच, विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद स्थिति का दो दिवसीय मूल्यांकन करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ एक मार्च को पश्चिम बंगाल का दौरा करने वाली है। इसके तुरंत बाद, आयोग इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों की मतदान तिथि की घोषणा कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, आयोग पिछले चुनावों की तुलना में कम चरणों में चुनाव कराने पर विचार कर रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने एक चरण में चुनाव कराने का सुझाव दिया है, जबकि अंतिम निर्णय आयोग के हाथ में होगा।
