
आसनसोल। आसनसोल स्थित काजी नजरुल विश्वविद्यालय में ‘नज़रुल सेंटर फॉर सोशल एंड कल्चरल स्टडीज ’ (NCSCS) के तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक आयोजन में पश्चिम बंगाल सरकार के शिक्षामंत्री ब्रात्य बसु, मंत्री मलय घटक, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) उदय बंद्योपाध्याय सहित अनेक शिक्षाविद और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। संगोष्ठी का केंद्रबिंदु काजी नजरुल इस्लाम के दर्शन, उनके समतावादी चिंतन और साहित्यिक योगदान पर गंभीर चर्चा रहा। वक्ताओं ने कहा कि नजरुल की विचारधारा आज भी समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की प्रेरणा देती है। उनके समानता, मानवता और न्याय के सिद्धांत आधुनिक समाज और शिक्षा जगत को अधिक समावेशी और प्रगतिशील बनाने में सहायक हो सकते हैं।
कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में देश और विदेश से आए विद्वानों ने नजरुल के साहित्य, सामाजिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक सोच पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान इस बात पर विशेष मंथन हुआ कि नजरुल की विचारधारा को वर्तमान सामाजिक और शैक्षणिक परिप्रेक्ष्य में किस प्रकार प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। उपस्थित अतिथियों ने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंच ज्ञान के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
