बेलडांगा हिंसा : आरोपितों को सुरक्षा देने में विफल रही पुलिस, नहीं हो सकी पेशी

कोलकाता, 12 फरवरी । मुर्शिदाबाद जिले के अल्पसंख्यक बहुल बेलडांगा क्षेत्र में हालिया हिंसा मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) गुरुवार को दूसरी बार 36 आरोपितों को विशेष एनआईए अदालत में पेश करने में विफल रही।

सूत्रों के अनुसार, मुर्शिदाबाद जिला पुलिस द्वारा पर्याप्त पुलिस एस्कॉर्ट उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण आरोपितों को अदालत तक नहीं लाया जा सका। इससे पहले पांच फरवरी को भी एनआईए टीम आरोपितों को अदालत में पेश नहीं कर पाई थी। उस समय भी राज्य पुलिस द्वारा पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध न कराए जाने को कारण बताया गया था।

जानकारी के मुताबिक, एनआईए ने आरोपितों को अदालत में पेश करने के लिए मुर्शिदाबाद जिला पुलिस को औपचारिक अनुरोध भेजा था। हालांकि, जिला पुलिस ने यह कहते हुए एस्कॉर्ट देने में असमर्थता जताई कि पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित उच्च माध्यमिक परीक्षाओं के चलते पुलिस बल की तैनाती अन्यत्र की गई है। गुरुवार से राज्य में उच्च माध्यमिक परीक्षाएं शुरू हुई हैं।

उल्लेखनीय है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय को मामले में एनआईए जांच शुरू करने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद एनआईए ने बेलडांगा हिंसा की जांच अपने हाथ में ली।

बताया गया है कि पिछले महीने एक प्रवासी श्रमिक की झारखंड में हत्या की कथित फर्जी खबर को लेकर क्षेत्र में तनाव और हिंसा भड़क उठी थी। बाद में झारखंड पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि संबंधित श्रमिक की मौत आत्महत्या के कारण हुई थी। पुलिस ने अपने बयान के समर्थन में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी हवाला दिया था।

पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, 11 फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय की द्वि-न्यायाधीशीय पीठ ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। साथ ही एनआईए को निर्देश दिया कि वह जांच पूर्ण होने के बाद या जांच के दौरान, दोनों ही स्थिति में, अपनी स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि एनआईए अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट करे कि एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं।

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