पंचायत चुनाव में कार्यकर्ताओं की हत्या को दरकिनार कर सोनिया से मिलने चलीं ममता

 

कोलकाता, 17 जुलाई । पटना के बाद बेंगलुरु में कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री सोनिया गांधी की ओर से दिए गए रात्रिभोज में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी शामिल होने जा रहे हैं। करीब 26 विपक्षी दलों के मुख्य नेता इसमें शामिल होंगे। खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में कांग्रेस और तृणमूल कार्यकर्ताओं की हत्या और इसके लिए दोनों की ओर से एक दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों को दरकिनार कर ममता और सोनिया की यह मुलाकात राज्य की राजनीति में सुर्खियों में है। सूत्रों ने बताया है कि पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बैठक में जाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने हाल ही में हुए घुटने के ऑपरेशन का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे से कह दिया था कि उन्हें बहुत अधिक चलने फिरने की अनुमति नहीं है। इसके बाद कांग्रेस की ओर से उन्हें लगातार मनाने की कोशिश की गई और कहा गया कि आप रात्रि भोज में आइए। आपको कहीं चलना फिरना नहीं पड़ेगा। एक जगह बैठे रहिएगा। वही सारे लोग आएंगे। उसी के बाद ममता बनर्जी इसमें शामिल होने के लिए तैयार हुई हैं। खड़गे ने सीएम को फोन पर यह भी बताया था कि अगर इस बैठक में आप नहीं आएंगी तो विपक्षी एकता टूटने का संकेत जाएगा जो भारतीय जनता पार्टी के लिए मददगार साबित हो सकता है। इसके बाद ही ममता इस बैठक में शामिल होने के लिए तैयार हुई हैं। सूत्रों ने बताया है कि ममता और अभिषेक के साथ कैबिनेट के कुछ मंत्री भी जा सकते हैं। हालांकि इस बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। ममता सोनिया की इस मुलाकात को लेकर भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने लिखा है कि दिल्ली कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी तरह से मंच साझा करने पर नाराजगी जाहिर की है। उसी तरह से बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी के खूनी सत्ता का विरोध किया है। लेकिन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया है। कांग्रेस ने हमेशा अपने राज्य इकाइयों को दरकिनार कर राहुल गांधी के इर्द-गिर्द कुछ लोगों की सलाह मानी है ताकि उन्हें किसी भी तरह से लाइमलाइट में रखा जा सके।
इसके साथ में अमित मालवीय ने पूछा है कि क्या राहुल गांधी में इतनी हिम्मत है कि बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान मारे गए अपने कार्यकर्ताओं के पक्ष में आवाज उठा सकें। हकीकत यह है कि वह ममता बनर्जी से डरे हुए हैं और अपना मुंह नहीं खोल सकते हैं। यहां तक कि मारे गए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिवार के साथ भी संवेदना नहीं जता सकते हैं।

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