वृद्धावस्था में आने वाला वैराग्य सच्चा वैराग्य नहीं होता– माधव जी महाराज

चिरकुंडा। चिरकुंडा-पंचेत रोड के तीन नं चढ़ाई स्थित श्रीश्री राम भरोसा धाम सार्वजनिक मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा एवं स्थापना की प्रथम वर्षगांठ पर सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को वृन्दावन से आए कथावाचक माधव जी महाराज ने कहा कि “”वृद्धावस्था में आने वाला वैराग्य सच्चा बैराग्य नहीं होता।”जवानी में ही बैराग्य की परीक्षा होती है। जिसके पास कुछ नहीं है वह त्याग करे तो उसका कोई अर्थ नहीं है । जवानी में सुख संपत्ति होने पर भी विषय सुख से मन विषय सुख में मन न रमे ,वही सच्चा बैराग्य कहला सकता है। जिसे युवावस्था में ही बैराग्य हो और जो संयम कर के भजन प्रवृत्ति बढाए,उसे वृद्धावस्था में भगवान की प्राप्ति होती है। वृद्धावस्था में शारीरिक अशक्ति हो जाने के कारण जीव भक्ति कर नहीं सकेगा। तपश्चार्य यौवन में ही की जा सकती है। वृद्धावस्था में तपश्चर्या करने का करने से अगला जन्म सुधरेगा। शरीर दुर्बल होने के बाद ब्रह्मचर्य का पालन करने का कोई अर्थ नहीं है।श्री रामचंद्र जी युवावस्था में ही वन में गए थे। वनवास के समय उनकी आयु सत्ताइस वर्ष की थी और सीता जी की अठारह वर्ष की। श्री रामचंद्र ने यौवन में ही रावण को मारा था।अत: जीव को भी अपनी युवा अवस्था में ही काम रूपी रावण का नाश करना चाहिए।
भागवत कथा को सफल बनाने में मंदिर के प्रधान पुजारी राम रतन पांडेय,आचार्य अविनाश पांडेय, एकानन्द पांडेय,मनोज कुमार पांडेय,सत्येंद्र पांडेय,पुरुषोत्तम पांडेय,शशि भूषण पांडेय तथा चिरकुंडा के भक्तगण उपस्थित थे।

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