कोलकाता । विधानसभा में एक भी सीट ना होने के बावजूद मंगलवार को वाममोर्चा के इंसाफ सभा को लेकर तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने काफी सकारात्मक बात की। उन्होंने कहा कि मैंने जो देखा, उससे 2011 में सत्ता से बेदखल होने के बाद यह उनकी सबसे बड़ी जनसभा है। संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष आएगा, मार्च करेगा, बैठक करेगा, सरकार की आलोचना करेगा… यह बहुत ही सामान्य है। आज की इंसाफ सभा में कई छात्र-युवा नेता मौजूद थे। उन्होंने वहां अपना वक्तव्य रखा। हमारी आलोचना भी की। लेकिन सभा संसदीय लोकतंत्र के ढांचे के भीतर हुई।
भाजपा की सचिवालय अभियान के दौरान होना हुई हिंसा का जिक्र करते हुए प्रमुख प्रवक्ता ने कहा कि पिछले दिन की तरह चरम अराजकता, ईंटें फेंकना, पुलिस को मारने की कोशिश करना, कोसना, अपमान करना, मेरे शरीर को मत छुओ… यह सब नहीं हुआ। हालांकि लोग वामपंथ की नीतियों सहमत नहीं होते हैं। लेकिन इसके बावजूद उनकी जनसभा में लोग पहुंचे। जनसभा की गई लेकिन उन्होंने पुलिस पर हमला नहीं किया। वे भी यह नहीं कह सकते कि कहीं गड़बड़ी है। लोकतंत्र का ऐसा स्वस्थ वातावरण रहने दें। कुणाल घोष ने कहा कि वामपंथी छात्र-युवाओं की ”इंसाफ सभा” व्यवस्थित ढंग से हुई।
इस बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने वामपंथी छात्रों और युवाओं की बैठक को लेकर कहा कि वामपंथ का मार्च कहना गलत होगा। यह सीपी मूल का मार्च था। माकपा से ज्यादा तृणमूल के लोग थे। उन्होने गलती से ”जॉय बांग्ला” नहीं कहा… यही बहुत है। इस तरह के आंदोलनों को विपक्ष के वोट को विभाजित करने के लिए प्रायोजित किया जाता है। तृणमूल ने मोहम्मद सलीम को सुपारी दी ताकि माकपा के जरिए भाजपा के कुछ वोट काटे जा सकें।
