चार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई काे लेकर निर्वाचन आयोग सख्त, मुख्य सचिव से 72 घंटे में रिपोर्ट तलब

 

कोलकाता, 21 जनवरी । गलत तरीके से मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आरोप के मामले से जुड़े चार अधिकारियों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल सरकार से रिपाेर्ट तलब की है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी विस्तृत रिपोर्ट 72 घंटे के भीतर भेजी जाए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट 24 जनवरी को शाम पांच बजे तक अनिवार्य रूप से सौंपी जाए।
आयोग ने अपने पत्र में यह भी जानना चाहा है कि किस अधिकारी या विभाग ने उसके निर्देशों का पालन नहीं किया और किन कारणों से आदेशों को लागू नहीं किया गया। आयोग ने निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों या विभागों ने आयोग के निर्देशों की अवहेलना करते हुए निर्णय लिया, उनसे लिखित स्पष्टीकरण लिया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया।
इसके साथ ही निर्वाचन आयोग ने चारों अधिकारियों के खिलाफ हुई पूरी जांच से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे हैं, जिनमें लगाए गए आरोप, जांच रिपोर्ट, अधिकारियों के जवाब, दंडादेश और फाइल नोटिंग शामिल हैं।
गौरतलब है कि, पूर्व मेदिनीपुर जिले के मयना और दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में गलत ढ़ंग से मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के आरोपों के बाद आयोग ने संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और निलंबन के निर्देश दिए थे। जिन चार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया गया था, वे हैं तथागत मंडल, देवोत्तम दत्तचौधुरी, विप्लब सरकार और सुदीप्त दास। ये सभी पश्चिम बंगाल सिविल सेवा के अधिकारी हैं।
आयोग ने उस समय के मुख्य सचिव मनोज पंत को भी इन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे और इस संबंध में दो बार पत्र भेजा गया था। इसके बावजूद आदेशों के पालन में देरी होने पर आयोग ने दो जनवरी को संबंधित दो जिलाधिकारियों को सीधे एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। हालांकि, लगभग 20 दिन बीत जाने के बावजूद यह निर्देश भी लागू नहीं किए गए। इस बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने जिलाधिकारियों को दो बार रिमाइंडर भेजे।
इसके बाद नवान्न (राज्य सचिवालय) ने राज्य के एडवोकेट जनरल से कानूनी सलाह ली और फिर सीईओ कार्यालय को पत्र भेजा। पत्र में कहा गया कि चारों अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और कथित तौर पर मामूली अपराधों के लिए इतनी कड़ी सजा देना उचित नहीं होगा। इसी संदर्भ में राज्य की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि “लघु दोष” के लिए “गंभीर दंड” क्यों दिया जा रहा है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग अपने रुख पर अडिग रहा और बुधवार को मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली।
उल्लेखनीय है कि, देवोत्तम दत्तचौधुरी और तथागत मंडल बारुईपुर पूर्व में क्रमशः ईआरओ और एईआरओ के रूप में कार्यरत थे, जबकि विप्लब सरकार और सुदीप्त दास मयना विधानसभा क्षेत्र में इन्हीं पदों पर तैनात थे। वर्तमान में देवोत्तम दक्षिण 24 परगना जिला ग्रामीण विकास एजेंसी में डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं, तथागत मंडल जयनगर-1 ब्लॉक में 100 दिन की रोजगार योजना से जुड़े सहायक अधिकारी हैं, विप्लब सरकार पूर्व मेदिनीपुर में जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हैं और सुदीप्त दास तमलुक ब्लॉक में पंचायत अकाउंट्स एवं ऑडिट अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा, सुरजीत हलदार नामक एक डाटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

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