
कोलकाता । निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर, राजगुरु बीकानेर स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने श्री गुरु गीता पर सत्संग भवन में अपने प्रवचन में कहा गुरु तत्व दिव्य ऊर्जा, आध्यात्मिक चेतना है जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश करती है । भारतीय अध्यात्म में गुरु को साक्षात परब्रह्म माना गया है (गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः…) । गुरु केवल शरीर नहीं, बल्कि एक शाश्वत तत्व है । जब शिष्य की चेतना जाग्रत होती है, तो वह अंतर्मन में गुरु तत्व अनुभव करता है । जैसे पारस पत्थर लोहे को सोना बना देता है, वैसे ही गुरु अपने शिष्य को सत्संग और ज्ञान से उत्तम चरित्र, संस्कार और श्रेष्ठता प्रदान करते हैं । भगवान श्रीराम ने भी माता कौशल्या को कहा कि रावण के साथ युद्ध में विजय एवं सीता संग विवाह गुरु वशिष्ठ का आशीर्वाद है । सत्संग भवन के ट्रस्टी पण्डित लक्ष्मीकांत तिवारी, दीपक मिश्रा ने श्रद्धालु भक्तों से गुरु गीता प्रवचन का लाभ लेने का निवेदन किया ।
