
कोलकाता, 26 मई । तृणमूल नेता जहांगीर खान को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मंगलवार को उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में दी गई सभी अंतरिम राहतें और कानूनी सुरक्षा वापस ले लीं। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि 18 मई को प्रदान किया गया अंतरिम रक्षाकवच भी अब प्रभावी नहीं रहेगा।
वर्ष 2019 में जहांगीर खान के खिलाफ एक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें उन्हें अदालत से राहत मिली थी। उस राहत की अवधि बुधवार को समाप्त होने वाली थी। इसी कारण मंगलवार को मामला दोबारा हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए आया। सुबह संबंधित पक्ष के वकीलों की अनुपस्थिति के कारण मामला नियमित पीठ को भेज दिया गया। इससे साफ हो गया कि राहत की अवधि समाप्त होने के बाद उनकी गिरफ्तारी पर कोई कानूनी रोक नहीं रहेगी।
इसके अलावा, फलता विधानसभा उपचुनाव से पहले जहांगीर खान को हाई कोर्ट से एक अन्य अंतरिम संरक्षण भी मिला था। मंगलवार को उस मामले की भी सुनवाई हुई। राज्य पुलिस ने अदालत में अपनी रिपोर्ट दाखिल की। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को देखते हुए याचिकाकर्ता को अस्थायी राहत दी गई थी, लेकिन उन्होंने एफआईआर रद्द करने की मांग नहीं की थी। ऐसे में राहत जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।
अदालत ने पुलिस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मामले में जांच जारी रखी जा सकती है, इसलिए अंतरिम संरक्षण हटाया जाना चाहिए।
जहांगीर खान के वकील किशोर दत्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इसके बाद दोपहर में दोबारा सुनवाई हुई, जहां अदालत ने उनकी सभी अंतरिम राहतें समाप्त करने का आदेश दे दिया।
अदालत सूत्रों के अनुसार, फलता विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल उम्मीदवार रहे जहांगीर खान के खिलाफ कुल सात एफआईआर दर्ज हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अब उनकी सभी कानूनी सुरक्षा समाप्त हो चुकी हैं।
गौरतलब है कि फलता विधानसभा उपचुनाव से महज 48 घंटे पहले जहांगीर खान ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी थी। इससे पहले उन्होंने गिरफ्तारी से बचाव के लिए अदालत से अंतरिम संरक्षण प्राप्त किया था।
रविवार को घोषित उपचुनाव परिणामों में उन्हें करीब सात हजार से कुछ अधिक वोट मिले। जिस विधानसभा क्षेत्र में पिछले लोकसभा चुनाव में अभिषेक बनर्जी को डेढ़ लाख से अधिक मतों की बढ़त मिली थी, उसी क्षेत्र में इस बार तृणमूल उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई। सूत्रों के अनुसार, जहांगीर खान स्वयं मतदान करने नहीं पहुंचे थे।
