दुर्गापुर डीपीएल में दर्दनाक हादसा: कूलिंग टावर से गिरकर दो ठेका श्रमिकों की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

रेलिंग काटने के दौरान हुआ हादसा; बीएमएस ने लगाया लापरवाही का आरोप, मुआवजा और परिजनों को नौकरी की मांग

दुर्गापुर। दुर्गापुर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (डीपीएल) में बुधवार को एक दर्दनाक औद्योगिक दुर्घटना ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। प्लांट के नंबर-7 कूलिंग टावर पर मरम्मत कार्य के दौरान ऊंचाई से गिरने के कारण दो ठेका श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद पूरे डीपीएल परिसर में शोक और तनाव का माहौल बन गया तथा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कूलिंग टावर की रेलिंग काटने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से श्रमिक नीचे जा गिरे। इस दुर्घटना में अंडाल निवासी 54 वर्षीय उमेश साव तथा दुर्गापुर इस्पात नगरी के बी-ज़ोन निवासी 40 वर्षीय पिंटू कुमार घोष की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घायल श्रमिक को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
डीपीएल की जनसंपर्क अधिकारी स्वागता मित्रा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक तौर पर श्रमिकों द्वारा सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किए जाने की जानकारी मिली है, फिर भी दुर्घटना के वास्तविक कारणों की गहन पड़ताल की जाएगी।
घटना के बाद भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने डीपीएल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। बीएमएस के जिला सचिव मृण्मय बंद्योपाध्याय ने आरोप लगाया कि श्रमिकों को निम्न गुणवत्ता वाले सेफ्टी बेल्ट उपलब्ध कराए गए थे, जिनके क्षतिग्रस्त होने के कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि दुर्घटना के समय प्लांट मेडिकल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था और बाद में डीपीएल अस्पताल से डॉक्टर बुलाकर औपचारिक जांच कराई गई।
बीएमएस ने मृतक श्रमिकों के परिजनों को 15 लाख रुपये का मुआवजा, 60 हजार रुपये अंतिम संस्कार सहायता तथा परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार देने की मांग की है। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की भी मांग उठाई है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यस्थल सुरक्षा और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि यह दुर्घटना तकनीकी खामी का परिणाम थी या सुरक्षा प्रबंधन में किसी प्रकार की लापरवाही इसके लिए जिम्मेदार रही।

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