
कोलकाता, 26 मई । चुनाव परिणाम के बाद पार्टी की आंतरिक बैठक में नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाने वाले तृणमूल कांग्रेस के दो विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा मंगलवार शाम विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मिलने पहुंचे। उस समय स्पीकर के कक्ष में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।
स्पीकर कक्ष से बाहर आने के बाद दोनों विधायकों ने इसे “सौजन्य मुलाकात” बताया। हालांकि, इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में अटकलों का दौर फिर तेज हो गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह दिल्ली स्थित बंग भवन में भी ऋतब्रत बनर्जी को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ हंसते-बात करते देखा गया था, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
ऋतब्रत बनर्जी ने पत्रकारों से कहा कि हमने स्पीकर और मुख्यमंत्री दोनों के साथ सौजन्य मुलाकात की। हम रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।
जब उनसे पूछा गया कि मंगलवार को अचानक स्पीकर से मिलने क्यों पहुंचे, तो उन्होंने कहा कि पहले मिलने का अवसर नहीं मिला था। जिस दिन स्पीकर का चुनाव हुआ था, उस दिन काफी भीड़ थी। आज पता चला कि वह आए हैं, इसलिए मिलने चले आए।
इस बात को लेकर भी सवाल उठे कि जब मुख्यमंत्री स्पीकर कक्ष में मौजूद थे, उसी समय दोनों ‘बागी’ तृणमूल विधायक वहां क्यों पहुंचे। हालांकि ऋतब्रत ने कहा कि मैं और संदीपन रोज विधानसभा आते हैं। हम निर्वाचित सदस्य हैं।
एंटाली से तृणमूल विधायक संदीपन साहा ने भी कहा कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी “सिर्फ संयोग” थी। उन्होंने कहा कि हम सौजन्य मुलाकात के लिए आए थे। हम नए विधायक हैं। संयोग से मुख्यमंत्री भी वहां मौजूद थे। मुलाकात हुई, बातचीत हुई। एक समय हम उनके नेतृत्व में राजनीति करते थे। इसमें कोई विशेष बात नहीं है।
पिछले सप्ताह दिल्ली में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और ऋतब्रत बनर्जी की मुलाकात के बाद भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई थीं। मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी पहली बार दिल्ली गए थे और उसी दौरान पुराना बंग भवन में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।
ऋतब्रत ने बताया कि दिल्ली में मुख्यमंत्री ने विपक्षी विधायकों को प्रशासनिक बैठकों में शामिल होने की सलाह दी थी। मंगलवार को विधानसभा में भी उन्होंने यही बात दोहराई।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन प्रशासनिक बैठकों में बुलाया जाए तो जाना चाहिए।”
इसके बाद ऋतब्रत ने बिना नाम लिए अपनी ही पार्टी की पुरानी कार्यशैली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अगर 15 साल में कुछ नहीं हुआ, तो अब उस गलती को सुधारने में समस्या क्या है? वामपंथी सांसद रहते हुए मुझे कभी प्रशासनिक बैठकों में नहीं बुलाया गया। बाद में तृणमूल सांसद बनने पर बुलाया गया।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं मुख्यमंत्री का आभारी हूं कि उन्होंने सभी विधायकों को प्रशासनिक बैठकों में बुलाने का फैसला किया है। अगर विधायक नहीं जाएंगे तो क्षेत्र का विकास प्रभावित होगा। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में भी कहा था और आज भी कहा कि सभी की भागीदारी से ही विकास संभव है।”
