गौहत्या और ‘वंदे मातरम्’ विवाद पर मंत्री अग्निमित्रा पॉल का AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर पर तीखा प्रहार, कहा— “बंगाल में रहना है तो कानून और परंपराओं का सम्मान करना होगा”

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में गौहत्या और ‘वंदे मातरम्’ को लेकर छिड़े राजनीतिक विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि पश्चिम बंगाल में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को राज्य और देश के कानूनों का पालन करना होगा। मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को भारत की परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों अथवा राज्य के नियमों से आपत्ति है, तो वह दूसरे राज्य या किसी इस्लामिक देश में जाने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी कानून और राष्ट्रीय भावनाओं के विरुद्ध बयान देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने अपने बयान में कहा कि “भारत में रहकर भारतीय कानून, संविधान और राष्ट्रीय परंपराओं का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। कोई भी व्यक्ति समाज में वैमनस्य फैलाने या लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का प्रयास करेगा, तो उसका विरोध किया जाएगा।” दरअसल, पिछले कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल में गौहत्या तथा ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर द्वारा दिए गए कुछ बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया शुरू हो गई थी। भाजपा नेताओं ने उनके बयान को राज्य की संस्कृति और राष्ट्रीय भावना के खिलाफ बताते हुए कड़ी आलोचना की। इसी क्रम में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के मुद्दे पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े विषयों पर राजनीति करना उचित नहीं है। मंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और अधिक गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और समर्थकों ने अग्निमित्रा पॉल के बयान का समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रहित में बताया है। वहीं विपक्षी दलों ने इस बयान को उकसाने वाला और सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर राज्य में लगातार बयानबाजी तेज होती जा रही है।

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