“भव पर होने की वैतरणी है भागवत कथा”

कोलकाता, 18 मई (शंकर जालान)। भागवत कथा भव पार होने की वैतरणी है। भागवत कथा का श्रवण अगर पुरुषोत्तम मास में किया जाए तो अति उत्तम होता है। यह कहना है भागवताचार्य श्री राजकुमारजी द्विवेदी का। अधिक यानी पुरुषोत्तम मास के मौके पर जालान परिवार की ओर से आसनसोल के गुजरात भवन में द्विवेदीजी ने व्यासपीठ से उक्त बातें कही। कथा शुभारंभ से पूर्व दुर्गा मंदिर से मंगल और कलशयात्रा निकाली गई। श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन यानी सोमवार को भागवताचार्य ने भागवत के माहात्म्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि कलि काल में परमात्मा का साक्षात स्वरूप है श्रीमद्भागवत कथा। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद प्रभु की असीम कृपा से हमें यह मानव तन मिला है, जिसका सदुपयोग सत्कर्म और परोपकार में करना चाहिए। व्यासपीठ पर आसीन राजकुमारजी ने कहा कि संसार के सारे रिश्ते-नाते झूठे हैं और केवल एक परमात्मा का नाम सत्य है, जो हमारे साथ रहता है।

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