आसनसोल दक्षिण विधानसभा में बड़ा सियासी उलटफेर, सीपीएम नेता के बेटे ने थामा भाजपा का दामन

आसनसोल। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 के नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावी प्रचार के साथ-साथ दल-बदल की राजनीति भी जोर पकड़ती नजर आ रही है। इसी बीच आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।जानकारी के अनुसार,सीपीएम के पूर्व पार्षद एवं बोरो चेयरमैन मोतिश डोम के बेटे गोपाल बाद्यकर ने अपने कई समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। यह शामिली उस समय हुई जब भाजपा की उम्मीदवार अग्निमित्रा पाल वार्ड संख्या 38 और 39 में जनसंपर्क अभियान चला रही थीं। चुनावी माहौल के बीच अचानक हुई इस राजनीतिक बदलाव ने क्षेत्र का सियासी तापमान बढ़ा दिया है। गोपाल बाद्यकर के भाजपा में शामिल होते ही मौके पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भाजपा नेताओं ने इसे पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि इससे संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूती मिलेगी।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वामपंथी पृष्ठभूमि से जुड़े परिवार का भाजपा में शामिल होना स्थानीय वोट बैंक पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां पहले सीपीएम का प्रभाव मजबूत रहा है, वहां यह बदलाव भाजपा के पक्ष में माहौल बना सकता है। इससे चुनावी समीकरणों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि चुनाव से पहले नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होना अब आम होता जा रहा है। आसनसोल दक्षिण में हुई यह ताजा राजनीतिक शामिली इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े सियासी उलटफेर देखने को मिल सकते हैं। आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र इस बार एक हाई-प्रोफाइल सीट के रूप में उभर रहा है। यहां रोजगार, उद्योग, बुनियादी सुविधाएं और विकास जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में हैं। भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पाल लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनसंपर्क अभियान चला रही हैं और संगठन को मजबूत करने में जुटी हैं। ऐसे में इस नई शामिली को उनके चुनावी अभियान के लिए संजीवनी के रूप में देखा जा रहा है। गोपाल बाद्यकर और उनके समर्थकों के भाजपा में शामिल होने के बाद जहां भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है, वहीं अन्य राजनीतिक दल भी अपनी रणनीतियों को धार देने में जुट गए हैं, ताकि इस बदलाव के प्रभाव को संतुलित किया जा सके। कुल मिलाकर, आसनसोल दक्षिण में हुआ यह राजनीतिक घटनाक्रम सिर्फ एक सामान्य दल-बदल नहीं, बल्कि चुनावी समीकरणों में संभावित बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि यह परिवर्तन भाजपा के लिए कितना लाभकारी साबित होता है और आगामी चुनाव में जनता किसे अपना समर्थन देती है।

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