
रानीगंज। पश्चिम बर्धमान जिले के रानीगंज में गुरुवार को मतदाता सूची में संशोधन और कई अन्य मांगों को लेकर सीपीआईएम रानीगंज एरिया कमेटी की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने एक बिक्षोभ रैली निकालकर रानीगंज समष्टि विकास अधिकारी (बीडीओ) के कार्यालय तक मार्च किया और अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान सीपीआईएम कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 28 फरवरी को चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई मतदाता सूची में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम अभी भी “विचाराधीन”स्थिति में दिखाए गए हैं, जो चिंता का विषय है। पार्टी कार्यकर्ताओं के अनुसार, जारी सूची में रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के 17,847, आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के 16,278 और जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के 13,440 मतदाताओं के नाम अभी भी विचाराधीन के रूप में दर्शाए गए हैं। उनका कहना है कि सूची का अवलोकन करने पर यह भी सामने आता है कि इनमें से अधिकांश मतदाता गरीब और समाज के वंचित वर्ग से संबंधित हैं।प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि मतदाता सूची से फर्जी, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम तुरंत हटाए जाएं तथा प्रत्येक वैध और पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल किया जाए, ताकि आगामी चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।
इस मौके पर सीपीआईएम रानीगंज एरिया कमेटी के सचिव सुप्रियो राय ने कहा कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन की विफलता के कारण ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आम लोगों को अनावश्यक रूप से समन जारी कर परेशान किया गया और उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। सुप्रियो राय ने यह भी सवाल उठाया कि जब इतने प्रयासों के बाद भी तीनों विधानसभा क्षेत्रों में इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम अब तक विचाराधीन हैं, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आगे कहा कि जिन मतदाताओं के नाम 2002 की मतदाता सूची के साथ पहले ही मैपिंग हो चुके हैं, उन्हें तुरंत वैध मतदाता के रूप में घोषित किया जाना चाहिए। इसके अलावा जिन मतदाताओं के नाम अभी भी विचाराधीन रखे गए हैं, उनके संबंध में कारणों सहित पूरी सूची जल्द से जल्द सार्वजनिक की जानी चाहिए।सीपीआईएम नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मतदाता सूची से जुड़ी इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो पार्टी भविष्य में बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
