
आसनसोल। आसनसोल के बाराबनी पांचगछिया स्थित नूनी मोड़ इलाके में एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई। मंगलवार को एक अनियंत्रित ट्रैक्टर की टक्कर से धीरेंद्र (धीरन) घोष नामक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचे और घायल अवस्था में उन्हें आनन-फानन में आसनसोल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वही घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। इधर, हादसे की खबर फैलते ही मृतक के परिजन एवं स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे। उन्होंने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नूनी मोड़ पर प्रतिदिन ट्रैक्टरों की तेज रफ्तार और लापरवाह आवाजाही से लोगों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। ट्रैक्टर चालक नियमों की अनदेखी करते हुए बेपरवाह तरीके से वाहन चलाते हैं, जिससे लगातार दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर एक ही स्थान पर बार-बार दुर्घटनाएं क्यों हो रही हैं और पहले से रोकथाम के उपाय क्यों नहीं किए गए। हादसे के बाद ट्रैक्टर मालिक का कोई पता नहीं चल पाया है, जिससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया है। आम नागरिकों का कहना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों।
इस बीच यह भी चर्चा है कि मृतक के परिवार को 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि एक व्यक्ति के जीवन की कीमत इतनी मामूली राशि नहीं हो सकती। मृतक अपने परिवार का सहारा थे और उनकी असमय मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। यह आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है और इसे केवल औपचारिकता के रूप में देखा जा रहा है। इलाकावासियों ने स्पष्ट मांग रखी है कि ट्रैक्टर मालिक को सामने आकर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। मृतक के परिवार को सम्मानजनक और उचित मुआवजा दिया जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए स्थायी और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नूनी मोड़ की यह घटना अब केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ लोगों के आक्रोश का प्रतीक बन गई है। अब देखना है कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाते हैं।
