सरकारी पट्टा होने के बावजूद नहीं मिल रहा उचित मुआवजा, ईसीएल के खिलाफ ग्रामीणों का रोष

जामुड़िया। जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सालडांगा क्षेत्र में पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में इलाके के चार आदिवासी गांवों समेत अन्य समुदायों के प्रभावित परिवारों ने हिस्सा लिया। बैठक का आयोजन आदिवासी संगठन दिसम आदिवासी गाँउतार की पहल पर किया गया, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के केंदा एरिया की पुनर्वास नीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ईसीएल प्रबंधन उनके वर्तमान आवास और जमीन को खाली कराकर अन्य स्थान पर पुनर्वास की योजना बना रहा है। हालांकि कंपनी की ओर से आर्थिक मुआवजे की बात कही जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित मुआवजा उनकी जमीन और मकान के वास्तविक क्षेत्रफल व बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं है। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इलाके के कम से कम दो परिवारों के पास सरकारी पट्टा होने के बावजूद ईसीएल द्वारा उनकी जमीन और घर का सही मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि वैध दस्तावेज होने के बाद भी यदि उचित कीमत नहीं दी जाती है, तो यह सरासर अन्याय है।
बैठक के दौरान प्रभावित परिवारों ने अपनी समस्याओं को लिखित रूप में संगठन को सौंपा। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि आदिवासी समुदाय के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि सालडांगा क्षेत्र में जबरन या अनुचित तरीके से भूमि अधिग्रहण का प्रयास किया गया, तो वे व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
बैठक में संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सोरेन, राज्य आह्वायक शैलमान माड्डी और सुनील टुडू सहित कई कार्यकर्ता एवं स्थानीय निवासी उपस्थित थे। वक्ताओं ने कहा कि संगठन हमेशा से क्षेत्र की जनता के साथ खड़ा रहा है और आगे भी उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए, जमीन और मकान का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए तथा सरकारी पट्टा धारकों को उनका वैध अधिकार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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