फॉर्म-7 पर तृणमूल का सड़क आंदोलन, भाजपा बोली– फर्जी मतदाताओं की पोल खुलने का डर

 

हुगली, 21 जनवरी । फॉर्म-7 को लेकर हुगली जिले के बलागढ़ में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस ने बीडीओ कार्यालय के सामने एसटीकेके रोड को जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाकर विरोध जताया।
तृणमूल कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर धरना दिया। पुतलों को पहले जूते-चप्पलों से पीटा गया और फिर उनमें आग लगा दी गई। प्रदर्शन के कारण एसटीकेके रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का आरोप है कि बलागढ़ क्षेत्र में हजारों अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम पर फॉर्म-7 भरकर जमा कर दिए गए हैं। जिन मतदाताओं के नाम से ये फॉर्म जमा किए गए हैं, उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका है। साथ ही, उन्हें सुनवाई के नाम पर परेशान किए जाने की भी संभावना जताई गई है।
इसी के विरोध में यह आंदोलन किया जा रहा है। प्रदर्शन में बलागढ़ ब्लॉक तृणमूल नेतृत्व के साथ पूर्व विधायक असीम माझी, वर्तमान जिला परिषद सदस्य रूना खातून, पूजा धर, कोर कमेटी सदस्य नवीन गांगुली, श्यामाप्रसाद राय बनर्जी और संजय दास उपस्थित रहे।
बलागढ़ अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष मीर जसीमुद्दीन ने आरोप लगाया कि चुन-चुनकर तृणमूल समर्थकों के नाम पर फॉर्म-7 जमा किए गए हैं। उन्होंने मांग की कि यह बताया जाए कि ये फॉर्म किसने और कैसे जमा किए। उनका आरोप है कि भाजपा वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश कर रही है और चुनाव आयोग इसमें सहयोग कर रहा है। इस मामले में संबंधित पक्षों के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी के हुगली सांगठनिक जिले के इंचार्ज भास्कर भट्टाचार्य ने इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए “हिन्दुस्थान समाचार” से कहा कि तृणमूल कांग्रेस के लोग संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं। चुनाव आयोग को और कठोर होने की जरूरत है।

प्रदेश भाजपा नेता ने कहा कि तृणमूल नेत्री चुनाव आयोग को नहीं मानती, केंद्रीय जांच एजेंसी से फाइल छीन लेती है, अदालत को नहीं मानती। उनके नेता और कार्यकर्ता भी उनके राह पर चल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस के लोग डर गए है कि जिन फर्जी मतदाताओं के बल पर अब तक वे चुनाव जीत रहे थे, अब उनके नाम कट जायेंगे। चुनाव आयोग को और सख्त होने की आवश्यकता है।

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