बराकर। गोरा ए तू अवॉड देख बावड़ देख 16 दिवसीय गणगौर बिदाई गीत के साथ संपन्न हुआ, गणगौर का त्यौहार होलिका दहन के सात फेरे के साथ मनाया जाता है, बेटियां अपने विवाह के बाद अपने मायके में गणगौर की पूजा करती है, वही कुंवारी कन्याएं भी इनके साथ पूजा करती है, सभी मिलकर रोजाना ईशर गोरा को कुएं से पानी लाकर पिलाते है , गणगौर के गीत गाते है, अंतिम दिन गणगौर पूजने वाली लड़कियां सोलह कुएं से जल लाकर जल पिलाते है उसके बाद ईसर ओर गोरा की बिदाई नदी में विसर्जन कर करते है, वही सभी एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर खुशी का इजहार करती है।
16 दिवसीय गणगौर का त्योहार, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का दिन है. यह त्योहार राजस्थान और मध्य प्रदेश में ज़्यादा मनाया जाता है. गणगौर शब्द, भगवान शिव और पार्वती के नाम से मिलकर बना है. गण का मतलब है शिव और गौर का मतलब है पार्वती.
गणगौर त्योहार के पीछे की मान्यताएं
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपना पति मानने के लिए कठोर तपस्या की थी.
माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी माना था.
कहा जाता है कि चैत्र शुक्ला तृतीया को राजा हिमाचल की पुत्री गौरी का विवाह भगवान शंकर के साथ हुआ था. उसी की याद में यह त्योहार मनाया जाता है.
शास्त्रों के मुताबिक, मां पार्वती ने अखंड सौभाग्य की कामना से कठोर तपस्या की थी.
यह त्योहार, विवाहित महिलाओं और अविवाहित महिलाओं दोनों द्वारा मनाया जाता है.
इस त्योहार में महिलाएं अपने जीवनसाथी की सलामती के लिए प्रार्थना करती हैं.
अविवाहित महिलाएं अनुकूल पति की तलाश करती हैं.
