
कोलकाता । काशी से पधारे भागवताचार्य वेंकटेश मिश्र ने कान्यकुब्ज भवन में श्रीमद्भागवत कथा में श्रोताओं को भाव विभोर करते हुए कहा इस कथा का श्रवण करने वाला व्यक्ति भगवान से एकाकार होकर अपने सहज स्वरूप को स्वयं जान पाता है, आत्मीय सुख मिलता है ।
आचार्य श्री ने श्रीमद् भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा भगवान का दर्शन करना दिव्य दृष्टि से अनुभूति करने जैसा है । अर्जुन कृष्ण को अपना सखा मानते थे लेकिन जब उन्होंने दिव्य दृष्टि से उनका दर्शन पाया तो उन्हें भगवान माना ।

धर्मानुरागी, समाजसेवी पंडित लक्ष्मीकांत तिवारी(भैयाजी), शकुन्तला तिवारी, कलकत्ता कान्यकुब्ज सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्रा, सचिव कुलदीप दीक्षित, महिला समिति की अध्यक्ष प्रभा बाजपेयी, सचिव पूनम दीक्षित, संयोजक सुनील अवस्थी, रामलाल तिवारी, आशुतोष बाजपेई और सतीश शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत किया ।

मुख्य यजमान पंडित लक्ष्मीकांत तिवारी(भैयाजी) और श्रीमती शकुंतला तिवारी ने व्यासपीठ का पूजन और दया शंकर मिश्र, वीरेंद्र त्रिवेदी, अजय तिवारी, सुनील दीक्षित, बच्चू पांडे, मनीष बाजपेई, वीरेंद्र तिवारी, संगम पांडेय, मुकेश शर्मा, अशोक तिवारी, गुड्डन सिंह, सत्यम मिश्रा, पूनम दीक्षित, रेखा बाजपेयी, शीला अवस्थी, प्रेमा बाजपेयी, नीतू दीक्षित, मल्लिका बाजपेयी, शकुन पांडे और दुर्गा त्रिवेदी सहित श्रद्धालु भक्तों ने सामूहिक आरती की ।
