
कोलकाता । श्री वर्द्धमान जैन संघ में मुनि रविन्द्र विजय महाराज, मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सानिध्य में भक्तिमय वातावरण में तपागच्छीय संवत्सरी प्रतिक्रमण भक्ति भावना से सम्पन्न हुआ । बारसा सूत्र वांचन, चित्र दर्शन, चैत्य परिपाटी एवम् धार्मिक कार्यक्रमों में श्रावक – श्राविका भाव विभोर हो गये ।

मनसा-वाचा-कर्मणा…..जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए संवत्सरी महापर्व पर अन्तर्मन की साक्षी में श्री वर्द्धमान जैन संघ के सभी ट्रस्टी, चातुर्मास प्रबन्ध समिति, कार्यकारिणी सदस्यों एवं श्रावक – श्राविकाओं ने परस्पर विनम्रतापूर्वक क्षमा-याचना की । इस अवसर पर जैन भवन से पधारी साध्वी सम्यकप्रभा श्रीजी म.सा. आदि ठाणा एवं सभी श्रावक – श्राविकाओं ने परस्पर क्षमापना से आत्म शुद्धि कर नैतिक कर्तव्य का पालन किया ।

मुनि महेन्द्र विजय महाराज ने कहा पर्युषण पर्व की साधना – आराधना में लक्ष्य शारीरिक, मानसिक रूप से आत्म- संयम, अहिंसा का पालन और व्रत, उपवास के माध्यम से परमात्मा की कृपा प्राप्त करना है ।
