
कोलकाता । हम धर्म तीर्थ में बार-बार नहीं जा सकते तो अपने मन के भाव द्वारा भी उस महातीर्थ की भाव यात्रा कर अपने कर्मों की निर्जरा कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सकते हैं। ऐसी ही भाव यात्रा मुनि रविन्द्र विजय महाराज, मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सानिध्य में भक्ति पूर्वक कराई गई । श्री वर्द्धमान जैन संघ में सामूहिक भाव यात्रा में राज्य के मंत्री उमेश राय सहित श्रावक – श्राविकाओं ने जैन तीर्थ, मंदिरों के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया ।
भाव यात्रा के लाभार्थी मोहनलाल माणकचंद विनोद योगेश महावीर सेठिया एवम भंवरलाल देवेंद्र कुमार मोहित अरिहंत कोचर परिवार थे । श्री महावीर संघवी, महावीर आराधना मंडल, राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश से पधार कर अपने स्वर संवेदना से शत्रुंजय की भाव यात्रा करवाई ।

मुनिश्री रविन्द्र विजय महाराज ने कहा जैन धर्म में भाव यात्रा (मन और भावनाओं की यात्रा) शारीरिक रूप से किसी स्थान पर गए बिना, अपनी आंतरिक भावना, भक्ति और ध्यान के माध्यम से किसी महान तीर्थ (जैसे शत्रुंजय, गिरनार, पालीताना) की मानसिक व आध्यात्मिक यात्रा करने की एक पवित्र विधि है । भाव यात्रा में साधक या श्रद्धालु एक स्थान पर बैठकर (या मंदिर में) अपनी कल्पना और भक्ति से तीर्थ के हर पड़ाव, जिनालय, और मूलनायक भगवान के दर्शन करते हैं । शारीरिक अस्वस्थता, बीमारी या वृद्धावस्था के कारण जो लोग शाश्वत तीर्थों की यात्रा नहीं कर पाते, वे भाव यात्रा के जरिए वही पुण्य और आत्मीय आनंद प्राप्त करते हैं ।

श्री वर्द्धमान जैन संघ की चातुर्मास समिति से माणकचंद सेठिया, मोहनलाल कोचर, देवेंद्र कोचर एवं ट्रस्ट बोर्ड से विजयचंद बैद, रतन चंद बांगानी, महेंद्र सुराना, नरेंद्र बांठिया, दिलीप दुगड़ एवं कार्यकारणी सदस्यों में महेंद्र डागा, पारस सावनसुखा, संजय रामपुरिया, अशोक बांठिया, शिखर बांठिया, सुनील बांठिया, आशीष कोचर, जिनेन्द्र सावनसुखा, सौरव सुराना, आनंद बाँगाणी सहित सुनीता बाँगाणी, मनीष कोचर, प्रवीण बैद, अतुल कोचर, विवेक सावनसुखा का सक्रिय सहयोग रहा ।
