काव्य गोष्ठी में गूंजे अहसास के स्वर ।

 

लोकतंत्र सेनानी दयाशंकर मिश्र का अभिनंदन ।

कोलकाता । केवल काव्य परिवार, पश्चिम बंगाल इकाई तथा हिन्दी साहित्य अकादमी, कोलकाता संभाग के संयुक्त तत्वावधान में रंजीत भारती की अध्यक्षता में शब्दों और सुरों की गोष्ठी में 35 रचनाकारों के साथ मुख्य अतिथि मौसम जी, विशिष्ट अतिथि के के दुबे, डॉ रेशमी पाण्डा मुखर्जी मंच की गरिमा बढ़ा रहे थे । दयाशंकर मिश्र को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के कर कमलों से ‘लोकतंत्र सेनानी’ सम्मान की प्राप्ति पर बधाई दी गई और अंगवस्त्र प्रदान कर उनको सम्मानित किया गया । गोष्ठी के आरम्भ में भारती मिश्रा ने अपनी मधुर सुरीली आवाज में माँ सरस्वती की वंदना प्रस्तुत कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया ।

काव्य पाठ करने वाले रचनाकारों में शामिल रहे नंदलाल ‘रौशन’, जय कुमार रुसवा, डॉ रेशमी पांडा मुखर्जी, रंजीत भारती, दया शंकर मिश्र, कृष्ण कुमार दूबे, मौसम जी, विश्वजीत ठाकुर, प्रणति ठाकुर, रमा कांत सिन्हा, आलोक चौधरी, रवि पारख, डॉ उर्मिला साव, चित्रा रॉय ‘श्रीकृष्णवी’, नीतू शर्मा, कुमार प्रिंस, पायल शर्मा, शकील गोंडवी, शाहिद फरोगी, संजय शुक्ला, मनोज राजेंद्र मिश्र, गीता चन्द पात्र, सुरेन्द्र सिंह, प्रदीप धानुक, जातिब हयाल, राधा गुप्ता, मंजु बैज इशरत, डॉ उर्वशी श्रीवास्तव, राम नारायण झा, संजय गौतम, रंजीत सिंह, दीप चंद सोनकर, आदित्य त्रिपाठी, भारती मिश्रा और विश्वजीत शर्मा ‘सागर’ की रचनाओं को खूब सराहा गया।
पूरी गोष्ठी को अपने शब्दों की सहजता और बेहतरीन तालमेल से बांधे रखने का महती कार्य रमाकांत सिन्हा ने अपने कुशल संचालन से किया । कार्यक्रम के समापन पर विश्वजीत शर्मा ‘सागर’ ने उपस्थित सभी अतिथियों, रचनाकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया ।

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