रानीगंज के राजबाड़ी में नागा संतों का भव्य स्वागत, ऐतिहासिक उल्टा रथ महोत्सव को लेकर तैयारियां पूरी

रानीगंज। देशभर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के उपरांत आयोजित होने वाले ऐतिहासिक उल्टा रथ महोत्सव को लेकर रानीगंज में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का वातावरण व्याप्त है। शुक्रवार को आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। रानीगंज राजबाड़ी राज परिवार की ओर से श्रद्धालुओं के स्वागत, साधु-संतों के सत्कार तथा आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। इसी क्रम में गुरुवार को असम के प्रसिद्ध कामाख्या धाम से थानापति महंत नित्यानंद गिरी जी महाराज अनेक नागा साधुओं एवं संत-महात्माओं के साथ रानीगंज राजबाड़ी पहुंचे। उनके आगमन पर राज परिवार के सदस्यों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पुष्पवर्षा, माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंट कर भव्य स्वागत एवं सम्मान किया। इस दौरान राजबाड़ी परिसर धार्मिक जयघोष और भक्ति के माहौल से गूंज उठा। राज परिवार की सदस्य अनुराधा मालिया सराफ ने बताया कि साधु-संतों का सम्मान और सेवा करना उनके परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि अतीत में आर्थिक कठिनाइयों के कारण इस परंपरा का निर्वहन पहले जैसी भव्यता से नहीं हो पा रहा था, लेकिन अब परिस्थितियां अनुकूल होने के कारण राज परिवार एक बार फिर पूरे उत्साह, श्रद्धा और समर्पण के साथ इस परंपरा का निर्वहन कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के उल्टा रथ महोत्सव को व्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता भी आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लाखों श्रद्धालुओं की संभावित उपस्थिति के बावजूद सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की जाएंगी और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी। इस अवसर पर कामाख्या धाम से आए थानापति महंत नित्यानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि पश्चिम बंगाल सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की समृद्ध भूमि है, जहां वर्षभर विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में नागा संन्यासियों का विशेष महत्व है और वे धर्म, संस्कृति तथा राष्ट्र की रक्षा एवं कल्याण के लिए कठोर तपस्या और साधना करते हैं। महंत नित्यानंद गिरी जी ने कहा कि चारों मठों के शंकराचार्यों के निर्णय के बाद नागा संन्यासियों की समाज और राष्ट्र के प्रति सक्रिय भूमिका और अधिक बढ़ी है। इसी उद्देश्य से अब नागा संत देश के विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर समाज के बीच पहुंच रहे हैं तथा सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का संदेश दे रहे हैं। रानीगंज का ऐतिहासिक उल्टा रथ महोत्सव वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान रहा है। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सहित पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण वातावरण में इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का हिस्सा बन सकें। आयोजकों और प्रशासन को उम्मीद है कि श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में आयोजित होने वाला इस वर्ष का ऐतिहासिक उल्टा रथ महोत्सव भव्य, शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न होगा।

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