रानीगंज के सावित्री बालिका विद्यालय में शिक्षकों की देरी से उपस्थिति पर विवाद, भाजपा-एबीवीपी ने किया औचक निरीक्षण कर उठाये सवाल

रानीगंज। सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग के बीच पश्चिम बर्दवान जिले के रानीगंज स्थित तिलक रोड के सावित्री बालिका विद्यालय में बुधवार को शिक्षकों की कथित देरी से उपस्थिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) तथा भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कई शिक्षक-शिक्षिकाएं विद्यालय नहीं पहुंची थीं, जिससे नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन प्रभावित हुआ। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का कहना था कि विद्यालय खुलने के काफी देर बाद तक कई कक्षाओं में पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। इस दौरान अनेक छात्राओं को विद्यालय परिसर में इधर-उधर घूमते देखा गया। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि उस समय छात्राओं की समुचित निगरानी के लिए पर्याप्त संख्या में जिम्मेदार कर्मी मौजूद नहीं थे, जिससे विद्यालय की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। निरीक्षण के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के गौतम महतो, भाजपा ओबीसी मोर्चा रानीगंज मंडल के अध्यक्ष पिंटू कुमार वर्मन, उपाध्यक्ष संजय सिंह, एबीवीपी के अन्य सदस्य तथा बजरंग दल के कार्यकर्ता उपस्थित थे। मौके पर गौतम महतो और पिंटू कुमार वर्मन ने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य के निर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है। ऐसे में उनका समय पर विद्यालय पहुंचना और नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचेंगे तो इसका सीधा असर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ेगा। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा विभाग से मांग की कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही विद्यालयों में नियमित निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में प्रभावित न हो। वहीं, विद्यालय में उपस्थित शिक्षिकाओं ने प्रतिनिधिमंडल के आरोपों पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि विद्यालय के कई शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रतिदिन दूरदराज के क्षेत्रों से आवागमन करते हैं। कभी-कभी यातायात संबंधी समस्याओं और परिवहन में विलंब के कारण विद्यालय पहुंचने में थोड़ी देरी हो जाती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में समयपालन को लेकर और अधिक सतर्कता बरती जाएगी तथा ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।
विद्यालय प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि कुछ शिक्षिकाओं के देर से पहुंचने का कारण लंबी दूरी से आने के दौरान उत्पन्न यातायात संबंधी कठिनाइयां थीं। प्रशासन ने कहा कि भविष्य में सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां निर्धारित समय पर संचालित हो सकें। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वह इस मामले की प्रशासनिक समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करता है अथवा नहीं।

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