आसनसोल के घागरबुड़ी मंदिर से स्वच्छता का संदेश, मंत्री अग्निमित्रा पाल ने प्लास्टिक व तंबाकू मुक्त परिसर का किया आह्वान

स्वच्छता से स्वागत’ अभियान में नागरिकों से कहा— घर के साथ आसपास का वातावरण भी रखें साफ, तभी बनेगा स्वस्थ समाज

आसनसोल। स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने और धार्मिक स्थलों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त बनाने के उद्देश्य से रविवार को आसनसोल के ऐतिहासिक घागरबुड़ी मंदिर परिसर में ‘स्वच्छता से स्वागत’ अभियान के तहत विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य की नगर प्रशासन एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल शामिल हुईं। उन्होंने मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प दिलाते हुए प्लास्टिक, गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि धार्मिक स्थल केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने के भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे स्थानों की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक श्रद्धालु और नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के प्लास्टिक बैग का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही गुटखा, पान मसाला, तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों का सेवन अथवा उन्हें परिसर में लाना भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने कहा कि “स्वच्छ मंदिर, स्वच्छ शहर और स्वच्छ समाज का सपना तभी साकार होगा, जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी को समझे और उसका ईमानदारी से पालन करे।”मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य सरकार के नेतृत्व में प्रदेशभर में ‘स्वच्छता से स्वागत’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल सरकारी स्तर पर सफाई कराना नहीं, बल्कि लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि जैसे लोग अपने घर को साफ-सुथरा रखते हैं, उसी प्रकार घर के बाहर की सड़क, गली, पार्क, बगीचे और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता का ध्यान रखना भी हर नागरिक का कर्तव्य है।
उन्होंने निजी भूमि मालिकों को भी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि खाली पड़े भूखंडों को गंदगी, झाड़ियों या जलभराव का केंद्र नहीं बनने देना चाहिए। यदि किसी निजी जमीन पर झाड़ियां उग आती हैं, कचरा जमा हो जाता है या नालियां जाम रहती हैं, तो उसकी सफाई की जिम्मेदारी संबंधित भूमि स्वामी की होगी। स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली और स्वच्छ सार्वजनिक स्थलों के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे पूजा-अर्चना के दौरान प्लास्टिक का उपयोग न करें तथा मंदिर परिसर को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें। इस अवसर पर मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने स्वच्छता का संकल्प लेते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि ‘स्वच्छता से स्वागत’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का व्यापक प्रयास है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर छोटी-छोटी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे, तो स्वच्छ और सुंदर समाज का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

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