
आसनसोल। आसनसोल नगर निगम में शुक्रवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब एक ही दिन तीन पार्षदों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। वार्ड संख्या 78 के पार्षद अशोक रुद्र, वार्ड संख्या 72 के पार्षद एवं बोरो चेयरमैन चैतन्य माझी तथा वार्ड संख्या 84 के पार्षद डॉ. देवाशीष सरकार ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। चैतन्य माझी ने पार्षद पद के साथ बोरो चेयरमैन का दायित्व भी छोड़ दिया। वहीं डॉ. देवाशीष सरकार इससे पहले ही बोरो चेयरमैन पद से इस्तीफा दे चुके थे और अब उन्होंने पार्षद पद भी छोड़ दिया। तीनों जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे के बाद नगर निगम और जिले के राजनीतिक गलियारों में विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि सभी ने अपने-अपने निर्णय के पीछे अलग-अलग कारण बताए हैं। डॉ. देवाशीष सरकार ने कहा कि उन्होंने लोगों के आवश्यक प्रमाणपत्रों, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों को पूरा करने के बाद ही इस्तीफा दिया है, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद वह संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन अपनी सोच और अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं कर पा रहे थे। इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया। पार्टी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि जिस राजनीतिक दल के टिकट पर वह निर्वाचित हुए थे, वह उसी के साथ हैं। हालांकि वर्तमान में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के कारण उन्होंने इस विषय पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं वार्ड 72 के पार्षद एवं बोरो चेयरमैन चैतन्य माझी ने अपने इस्तीफे की वजह पारिवारिक जिम्मेदारियों को बताया। उन्होंने कहा कि उनकी माता लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार हैं, जबकि उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। मां के इलाज के लिए उन्हें लगातार शहर से बाहर जाना पड़ता है, जिसके कारण वह अपने क्षेत्र की जनता को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे थे। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाने की भावना के चलते उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पद पर नहीं रहने के बावजूद वह अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा पहले की तरह करते रहेंगे। वार्ड 78 के पार्षद अशोक रुद्र ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उनके इस्तीफे के कारणों को लेकर आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। इससे राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वही इसको लेकर आसनसोल नगर निगम उपमेयर वसीम उल हक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अपने विवेक के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार है। यदि किसी को यह महसूस होता है कि वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अपेक्षित ढंग से नहीं कर पा रहा है, तो इस्तीफा देना उसका व्यक्तिगत निर्णय है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन पार्षदों के इस्तीफे के बावजूद नगर निगम की कार्यप्रणाली प्रभावित नहीं होगी और नागरिक सुविधाएं पूर्ववत जारी रहेंगी। बारिश के मौसम में निगम के कार्यों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव के संबंध में उन्होंने कहा कि स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। एक ही दिन में तीन पार्षदों के इस्तीफे ने आसनसोल नगर निगम की राजनीति को नई दिशा दे दी है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन इस्तीफों का असर नगर निगम की भावी रणनीति और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल नगर निगम और राजनीतिक दलों की ओर से आगे की रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
