
जामुड़िया। पश्चिम बर्दवान जिले के जामुड़िया क्षेत्र में बुधवार को उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई, जब कोयला श्रमिक नेता एवं पूर्व विधायक हरेराम सिंह के पुत्र प्रेमपाल सिंह के बहुला स्थित कार्यालय पर पुलिस ने अचानक छापेमारी की। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि समाचार लिखे जाने तक पुलिस की ओर से इस अभियान के उद्देश्य या बरामदगी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई थी। जानकारी के अनुसार, पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र के बहुला इलाके में स्थित प्रेमपाल सिंह के कार्यालय में बुधवार को जामुड़िया थाना प्रभारी सोमेन्द्र नाथ सिंह ठाकुर के नेतृत्व मे भारी पुलिस बल के टीम ने कार्यालय को घेरकर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान रानीगंज-जामुड़िया जोन के सर्कल इंस्पेक्टर मानस दास, अंडाल थाना प्रभारी गोपाल पात्रो, बनबहाल फांड़ी के प्रभारी सिरसेंदु दास सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस की गतिविधियों को देखकर आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई और पूरे क्षेत्र में इस कार्रवाई को लेकर चर्चा का माहौल बन गया। प्रशासन ने फिलहाल इस अभियान के संबंध में कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है, जिसके कारण कार्रवाई के वास्तविक कारणों को लेकर केवल अटकलों का दौर जारी है।गौरतलब है कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में जामुड़िया विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर हरेराम सिंह विधायक निर्वाचित हुए थे। उनके कार्यकाल के दौरान उनके पुत्र प्रेमपाल सिंह स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे और समय-समय पर विभिन्न कारणों से चर्चा में भी रहे। राजनीतिक हलकों में उनके नाम को लेकर कई बार विवाद और बहस का विषय बना रहा था। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पिछले विधानसभा कार्यकाल के दौरान प्रेमपाल सिंह की गतिविधियों को लेकर विपक्ष के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी कई बार सवाल उठे थे। उनके आचरण और कार्यशैली को लेकर सार्वजनिक स्तर पर भी चर्चाएं होती रही थीं। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में राज्य की सत्ता परिवर्तन के साथ ही जामुड़िया की राजनीतिक तस्वीर भी बदल गई। चुनाव के बाद जहां हरेराम सिंह कभी-कभार सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई दिए, वहीं प्रेमपाल सिंह लंबे समय से सार्वजनिक रूप से सक्रिय नजर नहीं आए। बुधवार को उनके कार्यालय पर हुई अचानक पुलिस कार्रवाई के बाद एक बार फिर उनका नाम राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। हालांकि यह कार्रवाई किसी शिकायत, जांच या अन्य प्रशासनिक कारण से की गई है अथवा नहीं, इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब पुलिस के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इस कार्रवाई के वास्तविक कारण सामने आ सकेंगे।
