
दुर्गापुर। औद्योगिक नगरी दुर्गापुर में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक तनातनी उस समय खुलकर सामने आ गई, जब राज्यसभा सांसद डोला सेन को भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों दलों के समर्थकों के बीच जमकर नारेबाजी हुई, जिससे कुछ समय के लिए इलाके में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर हालात को नियंत्रित कर लिया और किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोक दिया। जानकारी के अनुसार, दुर्गापुर इस्पात नगर स्थित चैतन्य एवेन्यू में तृणमूल कांग्रेस के श्रमिक संगठन दुर्गापुर इस्पात कारखाना मजदूर यूनियन की ओर से पश्चिम बंगाल के प्रथम मुख्यमंत्री एवं प्रख्यात चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र राय की जयंती के अवसर पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद डोला सेन शामिल हुईं। उन्होंने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन करते हुए रक्तदान को महादान बताया और अधिक से अधिक लोगों से इस सामाजिक अभियान से जुड़ने की अपील की।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जैसे ही डोला सेन यूनियन कार्यालय से बाहर निकलीं, पहले से मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले के सामने काले झंडे लहराते हुए विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने “डोला सेन हाय-हाय”, “डोला सेन वापस जाओ” और अन्य विरोधी नारे लगाए। विरोध के जवाब में तृणमूल समर्थक भी नारेबाजी करने लगे। कुछ देर के लिए दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बल तुरंत सक्रिय हुआ और दोनों पक्षों को अलग कर हालात पर काबू पाया। पुलिस अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को वहां से हटाया, जिसके बाद सांसद डोला सेन सुरक्षित रवाना हो सकीं। घटना के मद्देनजर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।.घटना के बाद राज्यसभा सांसद डोला सेन ने भाजपा के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पूरी तरह सामाजिक उद्देश्य से आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि डॉ. बिधान चंद्र राय की जयंती के अवसर पर प्रत्येक वर्ष रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं और वह इसी सामाजिक दायित्व के तहत कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं। उन्होंने कहा कि रक्तदान जैसे मानवीय और जनकल्याणकारी कार्य को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि जनप्रतिनिधियों के सामाजिक कार्यक्रमों का भी राजनीतिक विरोध किया जाएगा, तो यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप नहीं माना जा सकता। वहीं, इस विरोध प्रदर्शन के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया। दोनों दलों के नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर घटना को लेकर बयान दिए। हालांकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।
