
पांडवेश्वर। हूल विद्रोह की गौरवशाली विरासत और आदिवासी समाज के शौर्य, आत्मसम्मान तथा संघर्ष की स्मृति में मंगलवार को पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र के झरिया डांगाल में हूल दिवस श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी ने आदिवासी समाज के लोगों के साथ समारोह में भाग लिया तथा वीर शहीद सिधु मुर्मू, कानू मुर्मू एवं हूल विद्रोह के सभी अमर सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक जितेंद्र तिवारी ने कहा कि हूल विद्रोह केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, आत्मसम्मान और अन्याय के विरुद्ध अदम्य संघर्ष का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस इतिहास में आत्मगौरव, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की प्रेरणा समाहित हो, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। वीर शहीद सिधु मुर्मू, कानू मुर्मू तथा हूल विद्रोह के सभी सेनानियों का बलिदान भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है, जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष और साहस का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराएं, संस्कृति, जीवन-मूल्य और सामाजिक एकता देश की सांस्कृतिक विरासत को और अधिक समृद्ध बनाती हैं। इन परंपराओं का संरक्षण और सम्मान करना समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।विधायक ने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि हूल विद्रोह के इतिहास और उसके मूल संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए, ताकि युवाओं के मन में आत्मसम्मान, सामाजिक एकता, न्याय और अधिकारों के प्रति जागरूकता की भावना निरंतर बनी रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हूल दिवस की प्रेरणा समाज को समानता, न्याय और भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती रहेगी।कार्यक्रम में आदिवासी समाज के अनेक गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने वीर शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने और समाज में एकता, सम्मान एवं न्याय की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया।
