
कोलकाता, 29 जून । तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक फंड और बैंक खातों पर नियंत्रण को लेकर चल रहा विवाद अब कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंच गया है। कालीघाट तृणमूल खेमे की ओर से दायर याचिका में पार्टी फंड पर अधिकार तय करने की मांग की गई है।
पार्टी के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ में होने की संभावना है। अदालत ने फिलहाल संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पुलिस, बैंक प्राधिकरण और राज्य सरकार को भी पक्षकार बनाया गया है। तृणमूल की ओर से सोमवार दोपहर दो बजे तत्काल सुनवाई की अपील की गई, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को नोटिस जारी होने के बाद ही सोमवार या मंगलवार को सुनवाई पर विचार किया जाएगा।
यह विवाद तब सामने आया जब विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी की स्थिति पैदा हो गई। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग समूह ने खुद को “असली तृणमूल” बताते हुए अलग संगठनात्मक ढांचा तैयार करने का दावा किया। इस गुट की ओर से पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग भी उठाई गई थी।
इस बीच पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने संगठनात्मक टकराव का हवाला देते हुए बैंक खातों को फ्रीज करने की अपील की थी। बैंक को पत्र लिखकर लेनदेन रोकने का अनुरोध किया गया, जिसके बाद संबंधित खातों में लेनदेन पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
जानकारी के अनुसार, तीन बैंक खातों में मौजूद लगभग 440 करोड़ की राशि को फिलहाल निकाला नहीं जा सकता। बैंक की ओर से लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी तलब किए गए हैं। मामले में पुलिस की ओर से भी कार्रवाई की गई है।
अब यह पूरा विवाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत कलकत्ता उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जहां यह तय किया जाएगा कि पार्टी फंड और खातों पर वास्तविक नियंत्रण किसका होगा
