
आसनसोल। विधानसभा चुनाव के दौरान अवैध कोयला और बालू कारोबार को लेकर सभी राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। भाजपा ने उस समय तृणमूल कांग्रेस पर अवैध खनन, बालू तस्करी और तथाकथित माफिया तंत्र को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन अब सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर क्षेत्र में अवैध बालू कारोबार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कुछ समय तक गतिविधियां धीमी रहने के बाद जामुड़िया क्षेत्र के चुरुलिया स्थित अजय नदी घाट तथा बांकुड़ा जिले के मेजिया स्थित दामोदर नदी घाट से बड़े पैमाने पर बालू का परिवहन फिर से शुरू हो गया है। आरोप है कि वैध खनन और सरकारी अनुमति की आड़ में कई स्थानों से नियमों की अनदेखी कर बालू का उठाव किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रात के समय बालू लदे ट्रकों की आवाजाही बढ़ गई है। साथ ही कई ट्रकों में निर्धारित सीमा से अधिक बालू लोड किए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। रानीगंज के बल्लभपुर मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में बालू लदे वाहनों के गुजरने की चर्चा स्थानीय स्तर पर हो रही है।
नदी के बीचों-बीच खनन पर पर्यावरणीय चिंता
मेजिया दामोदर नदी घाट को लेकर सबसे अधिक विवाद नदी के मध्य भाग में किए जा रहे खनन को लेकर है। आरोप है कि नदी के बीच अस्थायी बांध बनाकर पोकलेन मशीनों की सहायता से गहराई में जाकर बालू निकाला जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियां नदी की प्राकृतिक संरचना को प्रभावित कर सकती हैं तथा जल प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के गहरे हिस्सों से निकाला जाने वाला महीन बालू बाजार में अधिक कीमत पर बिकता है, जिसके कारण इस प्रकार के खनन को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर किसी आधिकारिक पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई पर उठे प्रश्न
क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन को लेकर लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो संबंधित विभागों और प्रशासनिक एजेंसियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने पिछले कुछ महीनों में अवैध कोयला, बालू कारोबार और रंगदारी से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई करते हुए अनेक लोगों को गिरफ्तार भी किया है।इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर यह धारणा बनी हुई है कि कुछ क्षेत्रों में अब भी अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। यही कारण है कि नदी घाटों पर चल रही गतिविधियों को लेकर फिर से राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
भाजपा नेता ने जताई आपत्ति
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आसनसोल दक्षिण ग्रामीण भाजपा मंडल के अध्यक्ष परिमल माझी ने कहा कि मेजिया दामोदर नदी घाट पर एक निजी कंपनी को प्रशासनिक अनुमति के आधार पर बालू खनन का अधिकार प्राप्त है, लेकिन नदी की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाकर खनन किए जाने पर उन्हें पहले भी आपत्ति थी और आज भी है।
उन्होंने कहा कि नदी को सुरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक तरीके से बालू निकाला जाना चाहिए। यदि कहीं नियमों की अनदेखी कर नदी के बीच बांध बनाकर खनन किया जा रहा है अथवा ट्रकों में ओवरलोडिंग की जा रही है, तो इसकी शिकायत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, बीएल एंड एलआरओ कार्यालय तथा जिला प्रशासन से की जाएगी। परिमल माझी ने कहा कि इस विषय पर क्षेत्र की मंत्री अग्निमित्रा पाल से भी चर्चा की गई है तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में दामोदर नदी में जलस्तर कम होने का एक कारण दुर्गापुर बराज में चल रहा कार्य है, जिसके चलते मैथन जलाशय से पानी का प्रवाह अपेक्षाकृत कम हो गया है। इससे नदी के कुछ हिस्सों में जलधारा प्रभावित हुई है।
पर्यावरण संरक्षण और राजस्व के बीच संतुलन की चुनौती
दामोदर और अजय नदी घाटों पर उठ रहे विवाद ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि खनिज संसाधनों के दोहन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। जहां एक ओर बालू खनन से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है और निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध होते हैं, वहीं दूसरी ओर अनियंत्रित और अवैज्ञानिक खनन नदी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
अब देखना होगा कि स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन किस प्रकार कदम उठाता है तथा विवादित घाटों पर नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।
