
कोलकाता, 12 जून । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक पुनरुत्थान को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा है कि नंदीग्राम जैसी घटनाएं और जबरन भूमि अधिग्रहण के बिना भी उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आगामी बजट में उद्योग और निवेश को लेकर सरकार की योजनाओं की स्पष्ट झलक देखने को मिलेगी।
न्यू टाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, बेरोजगारी कम करने और औद्योगीकरण को गति देने के लिए उनकी सरकार “त्रिमुखी नीति” पर काम करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान उद्योग और निवेश के क्षेत्र में राज्य पीछे चला गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से प्रगतिशील राज्यों ने मुख्य रूप से उद्योग और निवेश के आधार पर विकास किया है। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी। इनमें राज्य सरकार के विभिन्न रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति, केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से छोटे-बड़े कारोबारियों और बेरोजगार युवाओं को सहायता प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा भारी उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, बागवानी और मत्स्य क्षेत्र में नए प्रसंस्करण केंद्र और औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
भूमि नीति पर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उद्योग, सीमा सुरक्षा बल के लिए भूमि उपलब्ध कराने या आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए किसी भी परिस्थिति में जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिलेगा तो वे स्वेच्छा से भूमि उपलब्ध कराएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वाम मोर्चा सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के दौरान की गई गोलीबारी का लोगों ने विरोध किया था, वहीं उद्योगपतियों को राज्य छोड़ने के लिए कहे जाने का भी जनता ने समर्थन नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार, रेलवे लाइन विस्तार और अन्य परियोजनाओं के लिए हाल के समय में लोगों ने निर्धारित मूल्य पर स्वेच्छा से जमीन उपलब्ध कराई है।
सिंगूर और टाटा समूह के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस विषय पर फिलहाल अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन टाटा समूह को पश्चिम बंगाल में वापस लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंगूर की भूमि अब सरकार के नियंत्रण में नहीं है क्योंकि पूर्ववर्ती सरकार ने उसका स्वामित्व किसानों को सौंप दिया था। हालांकि, उनके अनुसार उस भूमि की प्रकृति बदल जाने के कारण वहां पहले की तरह आलू, सरसों और धान की खेती नहीं हो पा रही है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार के समय आयोजित होने वाले बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (बीजीबीएस) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस आयोजन के लिए एक इवेंट प्रबंधन कंपनी को कुल 635 करोड़ का भुगतान किया गया था। उन्होंने कहा कि बीजीबीएस पर हुए खर्च और उससे जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच कराई जाएगी।
