ईश्वर प्रदत्त प्रतिभा से विद्या, ज्ञान अर्जित कर लक्ष्मी का सदुपयोग करें ।

गृहस्थ जीवन में गृहलक्ष्मी का सम्मान करें — पण्डित विजय शंकर मेहता

कोलकाता। अर्बनेश्वर देवालय ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सप्ताहव्यापी श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा एवं ज्ञान यज्ञ में व्यास पीठ से पंडित विजय शंकर मेहता ने देवी सरस्वती की तरह वाणी में मधुरता रखते हुए ईश्वर प्रदत्त प्रतिभा से विद्या, ज्ञान अर्जित करने एवं लक्ष्मी का सदुपयोग करने की प्रेरणा दी । पण्डित मेहता ने कहा लक्ष्मी से खुशियां आती है, सांसारिक सुख मिलता है । व्यापारियों के जीवन में लाभ का तात्पर्य लक्ष्मी है । लक्ष्मी का निवास हो, लेकिन अहंकार नहीं । कथा श्रवण करते हुए भक्त की पहचान है हाथ से ताली, चेहरे पर मुस्कान । जरा मुस्कुराइये … भक्ति भजन के गायन के साथ कहा लक्ष्मी सदैव मुस्कुराती है, गृहस्थ जीवन में गृहलक्ष्मी का सम्मान करें । माँ के स्नेह – वात्सल्य से बड़ी दुनिया नहीं, परिवार से बड़ा कोई धन नहीं, यही सद्गृहस्थ की पूंजी है । संतान के लिये रक्षा कवच बनाने की प्रेरणा देते हुए कहा ईश्वर की आराधना – साधना मानव जीवन की पूर्णता है । पण्डित मेहता ने श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा श्रवण करने के महत्व पर कहा प्रहलाद एवं राधा की भक्ति, गोपियों का श्रीकृष्ण प्रेम, हनुमान जी की प्रभु श्रीराम सेवा वेद व्यास एवं वाल्मीकि रचित पुराणों का सार है । कलयुग में देव – देवी पूजा विधान, सनातन परम्पराओं को लोग भूलते जा रहे हैं । कथा का उद्देश्य जनमानस को भारतीय धर्म – संस्कृति के प्रति जागरूक करना है । समाजसेवी के के सिंघानिया, गोपी धुवालिया, प्रदीप तोदी, प्रहलाद राय गोयनका, अशोक अग्रवाल, ओ पी किल्ला, बृजेश अग्रवाल एवं श्रद्धालु भक्तों ने व्यास पीठ का पूजन किया ।

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