
भारतीय धर्म – संस्कृति के प्रति आस्था कायम रखें — पण्डित विजय शंकर मेहता
कोलकाता। अर्बनेश्वर देवालय ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सप्ताहव्यापी श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा एवं ज्ञान यज्ञ में व्यास पीठ से पंडित विजय शंकर मेहता ने टाइम मैनेजमेंट की सरल आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा समय की घड़ी परिवर्तनशील है । शक्ति के साथ समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते हुए कहा सतयुग से कलयुग तक की कथा समय में परिवर्तन है । अयोध्या में रामराज्य, श्रीकृष्ण की लीला एवं महाभारत में गीता के उपदेश तथा बताए सत्मार्ग का अनुसरण करना जीवन की सार्थकता है । दिन, महीने, वर्ष और कैलेंडर की तरह बीता हुआ समय कोई नहीं लौटा सकता । पण्डित मेहता ने कहा मन चंचल होता है । वर्तमान समय में टेलीविजन, कंप्यूटर, मोबाइल, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रचलन है, लेकिन ए आई का सदुपयोग करते हुए भारतीय धर्म – संस्कृति के प्रति आस्था कायम रखें । भारत के ऋषि – मुनियों ने अपनी साधना से गुरुकुल शिक्षा के माध्यम से अनेक क्षेत्रों में विशिष्ट स्थान कायम किया है । गृहस्थ जीवन में धर्म – संस्कृति के प्रति आस्था, पति – पत्नी के आपसी मधुर सम्बन्ध से सुख – शान्ति रहती है । पण्डित मेहता ने कहा अयोध्या में राज्याभिषेक के समय श्रीराम ने सीता को कहा वो राजतिलक के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हम सभी एक पिता की संतान हैं । इसी त्याग की भावना से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन अनुकरणीय है । योग साधना से प्राप्त फल से जरा मुस्कुराइये । सम्पूर्ण परिसर में देवी भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला । राज्य के मंत्री दिलीप घोष, अर्बनेश्वर देवालय ट्रस्ट के ट्रस्टी के के सिंघानिया, शुभंकर भट्टाचार्य (वरिष्ठ पुलिस अधिकारी), समाजसेवी विश्वनाथ चौधरी, नितिन सिंघी, पण्डित लक्ष्मीकांत तिवारी, सुभाष मुरारका एवं श्रद्धालु भक्तों ने व्यास पीठ का पूजन किया ।
