
जामुड़िया। जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर जारी आंदोलन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। श्रमिकों का आरोप है कि आज भी कई निजी कारखानों में उनसे निर्धारित समय से अधिक कार्य कराया जाता है, लेकिन इसके अनुरूप वेतन और सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। इसी क्रम में जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के जादूड़ागा स्थित बीएसटी (BST) नामक निजी कारखाने के श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कारखाने के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारी श्रमिकों की मुख्य मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन, प्रतिमाह चार सवैतनिक अवकाश, आठ घंटे की कार्य अवधि तथा कार्यस्थल पर समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है। श्रमिकों का आरोप है कि उनसे 12 घंटे तक काम कराया जाता है, जबकि भुगतान केवल आठ घंटे के हिसाब से किया जाता है। साथ ही उन्हें राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने कारखाने के मुख्य प्रवेश द्वार के समक्ष एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। उनका कहना था कि वे पहले भी कई बार इन मुद्दों को लेकर आंदोलन कर चुके हैं तथा कारखाने के मुख्य द्वार का घेराव भी किया गया था, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। उनकी मांगों के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें नियमित मासिक अवकाश नहीं दिया जाता, वेतन भुगतान में भी अनियमितता रहती है तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से इन समस्याओं को झेलने के बावजूद प्रबंधन की ओर से संतोषजनक पहल नहीं की गई है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने स्पष्ट कहा कि वे केवल अपने वैधानिक अधिकारों और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि समान कार्य करने वाले सभी श्रमिकों को समान वेतन मिलना चाहिए तथा श्रम कानूनों के अनुरूप आठ घंटे की ड्यूटी और नियमित अवकाश की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। इस बीच क्षेत्र में श्रमिकों की समस्याओं और औद्योगिक इकाइयों में कार्य परिस्थितियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल श्रमिक संगठन और कारखाना प्रबंधन के बीच किसी समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में क्षेत्र के श्रमिकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि उनकी मांगों को लेकर प्रबंधन और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।
