
कोलकाता, 18 मई । पश्चिम बंगाल में गौवंश हत्या को लेकर राज्य सरकार की नई अधिसूचना के बीच कोलकाता की प्रसिद्ध नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने मुसलमानों से बकरीद के दौरान गाय की कुर्बानी से परहेज करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विविधतापूर्ण समाज में ऐसी किसी भी गतिविधि से बचना चाहिए जिससे दूसरे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
मौलाना कासमी ने कहा कि राज्य सरकार की हालिया अधिसूचना के बाद पशुवध की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के पशुवध पर रोक लगाई है और अब अधिकारियों द्वारा पशुओं की उम्र तथा शारीरिक स्थिति की जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं करा सकती तो उसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर पूरे देश में गायों के वध और गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर क्षेत्र में आधुनिक बूचड़खाने और बाजारों में पशु चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मौलाना कासमी ने मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा कि हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गाय की जगह बकरियों की कुर्बानी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में कुर्बानी का उद्देश्य त्याग और आस्था है, इसलिए सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी जरूरी है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून 1950 से लागू है, लेकिन अब इसे अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है। उनके अनुसार, पिछली सरकारों ने मुसलमानों को स्वतंत्रता तो दी, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
मस्जिदों में लाउडस्पीकर के उपयोग पर जारी निर्देशों को लेकर भी मौलाना कासमी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ध्वनि नियंत्रण संबंधी नियम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर आधारित हैं। उन्होंने मस्जिद समितियों से प्रशासन के साथ सहयोग करने तथा निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन सुनिश्चित करने की अपील की।
मौलाना कासमी ने यह भी कहा कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की खबरें सामने आई हैं, जबकि दिशा-निर्देशों में केवल ध्वनि सीमा के पालन की बात कही गई है, न कि लाउडस्पीकर पूरी तरह हटाने की।
