
कोलकाता, 18 मई । पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को प्रस्तावित पुनर्मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी जाहांगिर खान को कलकत्ता उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत मिल गई है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने सोमवार को सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि पुनर्मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक पुलिस जाहांगिर खान के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि तृणमूल प्रत्याशी को चुनाव लड़ने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि जाहांगिर खान को जांच में पूरा सहयोग करना होगा। अदालत के आदेश के अनुसार, अब तक उनके खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियों के मामले में उन्हें अंतरिम रक्षाकवच प्रदान किया गया है। यह संरक्षण आगामी 24 मई तक प्रभावी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि सोमवार सुबह जाहांगिर खान ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने अदालत को बताया कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और सार्वजनिक बयानों के कारण उन्हें आशंका है कि पुनर्मतदान से पहले पुलिस कार्रवाई की जा सकती है।
दरअसल, शनिवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फलता में आयोजित एक जनसभा में जाहांगिर खान पर तीखा हमला बोला था। मुख्यमंत्री ने कहा था, “चुनाव खत्म होने दीजिए, उसके बाद उसका इंतजाम करूंगा। इसकी जिम्मेदारी मेरी है।” इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई थीं।
दक्षिण 24 परगना की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में जाहांगिर खान एक प्रभावशाली चेहरा बनकर उभरे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान डायमंड हार्बर पुलिस जिले के पर्यवेक्षक और उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा तथा जाहांगिर खान के बीच कथित टकराव भी काफी चर्चा में रहा था। ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में चर्चित अजयपाल शर्मा की तुलना कई बार फिल्मी किरदार ‘सिंघम’ से की गई थी। इसके जवाब में जाहांगिर खान ने कहा था, “वह सिंघम हो सकते हैं, लेकिन मैं भी पुष्पा हूं… झुकेगा नहीं।”
मतदान समाप्त होने के बाद विपक्षी दलों ने फलता विधानसभा क्षेत्र के कई बूथों पर निष्पक्ष मतदान नहीं होने का आरोप लगाया था। शिकायतों की समीक्षा के बाद निर्वाचन आयोग ने संबंधित केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने का निर्णय लिया।
भारतीय जनता पार्टी ने लंबे समय से आरोप लगाया है कि फलता और डायमंड हार्बर क्षेत्र में जाहांगिर खान के नेतृत्व में हिंसा, अवैध वसूली और बूथ कब्जाने जैसी घटनाएं हुईं। विपक्ष का दावा रहा है कि कई स्थानीय लोगों को क्षेत्र छोड़ने तक के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि जाहांगिर खान ने इन सभी आरोपों को लगातार खारिज किया है।
हाल ही में पार्टी कार्यालय का उद्घाटन करते हुए जाहांगिर खान ने कहा था कि वह चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं और तृणमूल शासन के दौरान किए गए विकास कार्यों का जवाब जनता मतदान के जरिए देगी। अब उच्च न्यायालय से मिली अंतरिम राहत के बाद फलता उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है।
