आरजी कर कांड और भ्रष्टाचार पर शुभेंदु सरकार का बड़ा एक्शन, तीन आईपीएस समेत कई अधिकारी सस्पेंड

कोलकाता, 15 मई । पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था, जेलों में कथित भ्रष्टाचार और आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया। नवान्न में शुक्रवार काे आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान प्रशासन के कई स्तरों पर “रक्षक ही भक्षक” जैसी स्थिति बन गई थी और अपराधियों के साथ प्रशासन के कुछ लोगों की सांठगांठ विकसित हो गई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इस पूरे तंत्र को तोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रेसिडेंसी करेक्शनल होम में कैदियों के पास बड़ी संख्या में स्मार्टफोन इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें मिली थीं। इस शिकायत के बाद डीजी करेक्शनल होम एन. रमेश बाबू को मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस के साथ समन्वय कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
डीजी कारा एन. रमेश बाबू ने बताया कि कोलकाता पुलिस की मदद से प्रेसिडेंसी जेल में अचानक छापेमारी की गई। 10 विशेष टीमों ने करीब चार घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जेल के अलग अलग गुप्त स्थानों से कुल 23 मोबाइल फोन बरामद किए गए। अब इस बात की जांच की जा रही है कि ये मोबाइल फोन जेल के भीतर कैसे पहुंचे, कौन उनका इस्तेमाल कर रहा था और किन लोगों से संपर्क बनाए रखा जा रहा था।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि पूरे मामले की जांच सीआईडी को सौंपी जाएगी। साथ ही प्रशासनिक लापरवाही के आरोप में प्रेसिडेंसी करेक्शनल होम के सुपरिंटेंडेंट एन. कुजूर और चीफ कंट्रोलर दीप्त घोड़ाई को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच में गंभीर प्रशासनिक त्रुटियां, प्राथमिकी दर्ज करने और जांच प्रक्रिया में लापरवाही तथा पीड़िता के परिवार को कथित रूप से रिश्वत देने की कोशिश जैसे आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के आधार पर तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है।
निलंबित किए गए अधिकारियों में पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, तत्कालीन डीसी सेंट्रल इंदिरा मुखर्जी और तत्कालीन डीसी नॉर्थ अभिषेक गुप्ता शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार महिला समाज और मातृशक्ति के सम्मान के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि “अभया” कांड ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और घटना से जुड़े हर पहलू की गहराई से पड़ताल की जाए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि अभया कांड में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका की भी जांच होगी।

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