आसनसोल बस स्टैंड में ‘डेवलपमेंट फीस’ वसूली पर विवाद, भाजपा नेताओं ने उठाए सवाल

 


आसनसोल।,आसनसोल बस August में वर्षों से चल रही कथित “डेवलपमेंट फीस” वसूली को लेकर विवाद गहरा गया है। भाजपा नेताओं और श्रमिक संगठनों ने बसों से प्रतिदिन की जाने वाली वसूली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है। आरोप है कि पिछले करीब 15 वर्षों से बस स्टैंड से संचालित होने वाली बसों से प्रतिदिन 10 से 20 रुपये तक “डेवलपमेंट फीस” के नाम पर वसूली की जाती रही, लेकिन इसके बावजूद बस स्टैंड में यात्रियों और चालकों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकीं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि विकास के नाम पर लाखों रुपये की वसूली हुई, लेकिन उस राशि का उपयोग कहां हुआ, इसका स्पष्ट हिसाब सामने नहीं आया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने अब इस वसूली व्यवस्था को बंद कराने की मांग तेज कर दी है।
भाजपा नेता नीलू हाजरा ने आरोप लगाया कि बस स्टैंड से प्रतिदिन सैकड़ों बसें संचालित होती हैं और लंबे समय से उनसे पैसे वसूले जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह राशि नगर निगम के खाते में जमा हुई है तो उसका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में “कट मनी” और “सिंडिकेट संस्कृति” को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि किसी प्रकार की अवैध वसूली साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
2014 के पत्र के बाद फिर चर्चा में आया मामला
यह मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब श्रमिक नेता राजू अहलूवालिया ने वर्ष 2014 में तत्कालीन मेयर और पूर्व विधायक तापस बनर्जी द्वारा दक्षिण थाना प्रभारी को भेजे गए एक पत्र का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए।
बताया गया कि इस्माइल क्षेत्र निवासी अशिम मित्रा उर्फ “बच्चू” को बस एसोसिएशन की सिफारिश पर प्रति बस 5 रुपये “डेवलपमेंट फीस” वसूलने की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि अगस्त 2009 से फरवरी 2014 तक लगभग 26 लाख 40 हजार रुपये वसूले गए, जबकि नगर निगम के खाते में केवल 8 लाख 39 हजार 350 रुपये जमा हुए।
नगर निगम की ओर से उस समय बड़ी राशि जमा नहीं होने का दावा करते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई थी।
RTI के जरिए मांगा गया पूरा विवरण
राजू अहलूवालिया ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत आसनसोल नगर निगम से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा है कि किस नियम के तहत निजी व्यक्ति को वसूली की अनुमति दी गई, कुल कितनी राशि वसूली गई, निगम में कितनी राशि जमा हुई और क्या आधिकारिक रसीद जारी की जाती थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम बिना पारदर्शी प्रक्रिया के करीबी लोगों को टेंडर देता है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
भाजपा विधायक ने जांच की मांग उठाई
आसनसोल उत्तर के भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि यदि नगर निगम के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है तो पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार, कट मनी और सिंडिकेट व्यवस्था को संरक्षण नहीं देगी। हर दिन हजारों रुपये वसूली का दावा
जानकारी के अनुसार आसनसोल बस स्टैंड से करीब 350 मिनी बसें और 250 बड़ी बसें संचालित होती हैं। आरोप है कि यदि प्रत्येक बस से 10 से 20 रुपये प्रतिदिन लिए जाएं तो प्रतिदिन हजारों रुपये की वसूली होती है, जो महीने और साल भर में लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।
बस चालकों में नाराजगी
श्रमिक नेताओं का आरोप है कि कई बस चालक डर और दबाव के कारण खुलकर विरोध नहीं कर पाते। विरोध करने वालों के साथ दुर्व्यवहार और दबाव बनाए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि यदि वर्षों से विकास शुल्क लिया गया तो बस स्टैंड में यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय, प्रतीक्षालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहतर क्यों नहीं हुई।
अब पूरे मामले में जिला प्रशासन और नगर निगम की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर टिकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि वर्षों से “डेवलपमेंट फीस” के नाम पर वसूली गई राशि का वास्तविक उपयोग कहां हुआ और क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच हो पाएगी।

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