लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष और त्याग मिसाल : गोपाल शर्मा

जालौर के कल्याण यात्रिक भवन में लोकतंत्र सेनानी संघ का स्वर्ण जयंती महोत्सव
जयपुर/जालौर (आकाश शर्मा)। जालौर स्थित नंदीश्वरदीप जैन तीर्थ परिसर के श्री कल्याण यात्रिक भवन में रविवार को लोकतंत्र सेनानी संघ की ओर से स्वर्ण जयंती महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि जिन लोगों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया, उनका योगदान देश के लोकतंत्र की नींव को मजबूत करता है। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों और प्रबुद्धजनों की व्यापक उपस्थिति रही, जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने योगदान को साझा किया।


कार्यक्रम संयोजक मधुसूदन व्यास ने बताया कि प्रमुख रूप से मुख्य अतिथि देवस्थान एवं पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत, सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा, जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी, आहोर विधायक छगन सिंह राजपुरोहित, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह खीमाराम सुथार, पूर्व विधायक गोपीचंद गुर्जर, लोकतंत्र सेनानी संघ राजस्थान के अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद कैलाश सोनी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।


विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का त्याग, संघर्ष और बलिदान हमें यह सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान कई सेनानी जेलों में कठिन परिस्थितियों में रहे, लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भैरोंसिंह शेखावत जैसे नेता बीमार होने के बावजूद जेल में डटे रहे, जो त्याग और संकल्प का अद्वितीय उदाहरण है।
शर्मा ने कहा कि आपातकाल के खिलाफ आंदोलन शांतिपूर्ण विरोध की मिसाल था, जिसने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इमरजेंसी समाप्त होने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहेब देवरस द्वारा दिया गया संदेश “भूलो और आगे बढ़ो” भारतीय संस्कृति के उदार और समन्वयकारी दृष्टिकोण का प्रतीक है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि स्वतंत्रता सेनानियों की तर्ज पर लोकतंत्र सेनानियों को भी सुविधाएं प्रदान की जाएं। साथ ही जयपुर में लोकतंत्र सेनानी भवन के निर्माण और वहां ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।


कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि आपातकाल का दौर अत्यंत वीभत्स था, जिसमें सरकार के विरोध में आवाज उठाने वालों को कुचलने का प्रयास किया गया।
वहीं विधानसभा में सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने आपातकाल विरोधी आंदोलन के दौरान अपनी गिरफ्तारी के संस्मरण साझा करते हुए उस समय के संघर्षों को याद किया।
कार्यक्रम को राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत, जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी, आहोर विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने भी संबोधित किया और कांग्रेस की लोकतंत्र विरोधी नीतियों, आपातकाल की यातनाओं से जुड़े संस्मरण और घटनाएं साझा कीं।

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