
राजस्थान दिवस समारोह एवं वंदे मातरम् स्मारिका लोकार्पण सम्पन्न
कोलकाता, 29 मार्च। “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि राष्ट्रवाद का जीवंत मंत्र है जो हमारे अंदर राष्ट्रभक्ति की अलख जगाता है। वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है।” – ये उद्गार हैं राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज विभाग मंत्री श्री मदन दिलावर के जो राजस्थान परिषद द्वारा आयोजित राजस्थान दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपना वक्तव्य रख रहे थे। उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में नई चेतना का संचार किया। आज भी इसकी गूंज राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को सशक्त करती है।

नेशनल लाइब्रेरी सभागार मे आयोजित इस रंगारंग कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम् 150 वर्ष पूर्ति – गौरवशाली स्मरण’ स्मारिका का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रसिद्ध गायिका मारुति मोहता द्वारा वंदे मातरम् की सांगीतिक प्रस्तुति से हुआ। तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत किया श्री भागीरथ चांडक, बंशीधर शर्मा, सम्पत मान्धना, आनंद नारसरिया, विजया पारीक एवं विवेक तिवारी ने।

संपादकीय वक्तव्य रखते हुए भागीरथ सारस्वत ने स्मारिका के बारे में जानकारी दी। जिन्होंने डॉ प्रेमशंकर त्रिपाठी का विशेष आभार प्रकट करते हुए संपादन एवं प्रकाशन के दौरान के अनुभव साझा किए। तत्पश्चात साथी संपादक एवं पत्रकार सच्चिदानंद पारीक के साथ श्री मदन दिलावर के कर कमलों से स्मारिका लोकार्पण करवाया।

समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ प्रेम शंकर त्रिपाठी ने वंदे मातरम् की साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अक्षय नवमी के शुभ दिन रचित यह गीत सचमुच अक्षय है। मातृभूमि के प्रति समर्पण और श्रद्धा के अद्वितीय संगम वाला यह गीत भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् जैसे गीतों का स्मरण एवं विवेचन देश की गौरवगाथा एवं राष्ट्रीयता को नई अर्थवत्ता देगा। इस दृष्टि से स्मारिका की सामग्री पठनीय एवं महनीय है।

विशिष्ट अतिथि राजस्थान के नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि देशभक्ति और बलिदान में राजस्थानी हमेशा से अग्रणी भूमिका निभाते आए हैं। महाराणा प्रताप और राणा सांगा जैस शूरवीर पैदा करने वाली भूमि ने ही सिकंदर की विश्व विजय को चुनौती देकर उसे वतन वापसी की राह दिखाई थी। राजस्थान ने स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भी देश को सर्वाधिक वीर सैनिक और बलिदानी दिए हैं। अपने संबोधन में बंगाल की क्रांतिकारी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी धरती से निकलकर रास बिहारी बोस, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन कर स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। कार्यक्रम के दौरान मारुति मोहता द्वारा धरती धोरा री एवं अन्य सुमधुर राजस्थानी लोक गीतों की रंगारंग प्रस्तुति से पूरा सभागार झूम उठा।

नेशनल लाइब्रेरी के महानिदेशक अजय प्रताप सिंह ने कहा कि बंगाल की आर्थिक प्रगति में राजस्थानियों का विशेष योगदान है। हम सब भी अपने मूल गांव व विरासत से जुड़कर अपना कर्तव्य निभाने का प्रयास कर सकते हैं। नेशनल लाइब्रेरी भारत के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लाइब्रेरी और ज्ञानवर्धक पुस्तकें उपलब्ध करवाने को प्रतिबद्ध है। अध्यक्षीय वक्तव्य में सुप्रसिद्ध उद्योगपति श्रीयुत बेणुगोपाल जी बांगड़ ने स्मारिका के विषय चयन हेतु परिषद की भूरि भूरि प्रशंसा की तथा साधुवाद दिया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन किया महामंत्री अरुण प्रकाश मल्लावत ने तथा धन्यवाद ज्ञापन दिया परिषद अध्यक्ष श्री मोहन लाल पारीक ने।समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

इस गरिमामय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानी समाज के लोग, साहित्यकार, शिक्षाविद एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे जिनमें हरि प्रसाद बुधिया, भँवर लाल जैसनसरिया, जगदीश चंद एन मूंदड़ा, राजेन्द्र खण्डेलवाल, डॉ गिरिधर राय, ओम प्रकाश बांगड़, नंदलाल सिंघानिया, दीनदयाल जाजू , घनश्याम सूगला, राम गोपाल सूंघा, भँवरलाल राठी, रमेश शर्मा , प्रवीण गग्गड़, दिलीप लाहौटी, राजेश नागोरी, डॉ• सत्या तिवाड़ी, पुष्पा गोइनका, बेला मोहता, पारीक सभा से प्रभुदयाल, चंपालाल , बाबूलाल, भिकाराम, कृष्ण कुमार तथा विकास प्रमुख थे। कार्यक्रम में मनीष मंत्री, कृष्णा काकड़ा, अनुराग नौपानी, गोविंद जेथलिया, रंजीत मूंधड़ा, श्री मोहन तिवारी सक्रिय रहे।
