श्रीकृष्ण रास लीला प्रेम और भक्ति का सर्वोच्च रूप है – भागवताचार्य वल्लभ जी महाराज ।

कोलकाता । वृन्दावन से पधारे भागवताचार्य वल्लभ जी महाराज ने पी एस मैग्नम में समाजसेवी भवानीशंकर अग्रवाल, राजेश एवम् ममता अग्रवाल द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भजनों की अमृत वर्षा के साथ संगीतमय कथा सुना कर भाव विभोर किया । भागवताचार्य ने कहा रास लीला प्रेम और भक्ति का सर्वोच्च रूप है, जहाँ श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी से मोहित कर गोपियों के साथ नृत्य किया । रासलीला निष्काम, शुद्ध और आध्यात्मिक प्रेम का प्रतीक है ।

राधे – राधे भक्तिमय वातावरण में वल्लभ जी महाराज ने कहा रुक्मिणी ने अपना समर्पण कृष्ण के प्रति किया था और मन से पति मान लिया था । कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर द्वारका में रुक्मिणी से विवाह किया । यह प्रसंग भक्त और भगवान के अटूट रिश्ते और समर्पण को दर्शाता है । पी एस मैग्नम के निवासियों, श्रद्धालु भक्तों ने व्यास पीठ का पूजन किया एवम् सामूहिक आरती की । यश एवं रोहित अग्रवाल तथा परिवार के सदस्यों ने सभी का स्वागत एवम् आभार व्यक्त किया ।

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