
दुर्गापुर:औद्योगिक शहर दुर्गापुर में इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल की ओर से ह्यूमन राइट्स पर आधारित सेमिनार में मुख्य वक्ता और संस्था के चेयरमैन संजय सिन्हा ने कहा कि ,’मानवाधिकारों की आधुनिक व्याख्या से बहुत पहले, हमारे ऋषियों और शास्त्रों ने धर्म की रक्षा, करुणा से कार्य करने और न्याय सुनिश्चित करने के कर्तव्य की बात की थी। यह स्थायी नैतिक आधार आज भी हमारा मार्गदर्शन करता है। यह हमें याद दिलाता है कि मानवाधिकारों की सुरक्षा न केवल एक कानूनी दायित्व है, बल्कि एक आध्यात्मिक और नैतिक अनिवार्यता भी है, जो भारतीय जीवन शैली का अभिन्न अंग है।’ श्री सिन्हा ने आगे कहा कि ,’ भारत ने मानवाधिकारों का एक मज़बूत और व्यापक ढांचा तैयार किया है। वर्ष 1993 में अपनी स्थापना के बाद से, भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दुनिया के सबसे सम्मानित मानवाधिकार संस्थानों में से एक के रूप में विकसित हुआ है। दूसरी तरफ इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल सिर्फ़ एक संस्थागत उपलब्धि ही नहीं बल्कि यह हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के शाश्वत मूल्यों के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का समय है।’
इस मौके पर दूसरे वक्ताओं ने भी सेमिनार को संबोधित किया।चेयरमैन संजय सिन्हा ने समाज सेवी दीपक मुखर्जी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया और उन्हें तमाम दस्तावेज सौंपे।उपस्थित थे रंजीत राम दे,चंदन कुंडू,अंजन दे,कौशिक आदि।
