
कोलकाता । आस्था एवम भक्ति पर अपने विचारों को व्यक्त करते हुए समाजसेवी के डी अग्रवाल ने कहा कि हमारे 4 धर्म ग्रन्थ ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद व् अथर्ववेद को अनंत ज्ञान का अमूल्य भंडार माना जाता है, जो हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति की आधारशिला है । सनातन संस्कृति व वैदिक परम्परा को मानने वाले सभी मनुष्यों का धर्म ग्रन्थ वेद हैं । विडम्बना है कि वर्तमान समय में हिंदू समाज इतना ज्यादा दिशाहीन हो गया है कि हमारा मुख्य धर्मग्रंथ जैसे कोई व्यक्ति गीता, कोई रामायण, कोई उपनिषद, और कोई महाभारत तक बताता है, बहुत कम भारतीय (हिन्दू) वेद को अपने मुख्य धर्मग्रंथ के रूप में जानते हैं । जबकि दुनिया में दूसरे धर्म, पंथ या मज़हब को मानने व्यक्ति जैसे क्रिश्चियन धर्म को मानने वाले बाइबिल को, इस्लाम को मानने वाले कुरान को अपने धर्मग्रंथ के रूप में स्वीकारते हैं । भ्रमित हुए सनातनी हिन्दू समाज ने सर्वशक्तिमान ईश्वर की महता को कम करते हुए अनगिनत कुलदेवियों व देवताओं की पूजा को ही पूर्ण धर्म का स्वरूप दे दिया है । के डी अग्रवाल ने कहा वेदों के अनुसार ईश्वर प्राप्ति का माध्यम मुख्य रूप से ज्ञान, ध्यान, उपासना, कर्म और ॐ का जाप है । वेदों में कहा गया है कि ज्ञान के बिना धर्म और ईश्वर की अनुभूति संभव नहीं है । ईश्वर एक है और ॐ का नियमित जाप करने से मन एकाग्र होता है तथा व्यक्ति ईश्वर की अनुभूति को प्राप्त कर सच्चिदानंद का अनुभव करता है ।
