कोलकाता, 03 मार्च । चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत चिन्हित मतदाता पहचान दस्तावेजों की न्यायिक जांच प्रक्रिया को तेज करने के लिए झारखंड और ओडिशा से 200 अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का निर्णय लिया है। इनमें 100-100 अधिकारी दोनों राज्यों से आकर छः मार्च से इस प्रक्रिया में शामिल होंगे।
इन अधिकारियों की तैनाती का उद्देश्य लगभग 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच को तेजी से पूरा करना है, जिन्हें “तार्किक विसंगति” श्रेणी में रखा गया है। 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में इन मामलों को शामिल नहीं किया गया था और इन्हें “संदिग्ध” श्रेणी में रखा गया है। इन मामलों के निपटारे के बाद पूरक मतदाता सूचियां जारी की जाएंगी।
निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि न्यायिक अधिकारियों को जिलावार तैनात किया जाएगा और जिन जिलों में जांचाधीन मामलों की संख्या अधिक है, वहां अधिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी ताकि प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जा सके।
इस बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय और वेस्ट बंगाल सिविल सर्विस एग्जीक्यूटिव ऑफिसर्स एसोसिएशन के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी भी तेज हो गई है। संगठन ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल पर आरोप लगाया था कि उन्होंने जांचाधीन मामलों के लिए निर्वाचक निबंधन अधिकारियों और सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी मामलों के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है, हालांकि कुछ मामले निर्वाचक निबंधन अधिकारियों और सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारियों के स्तर पर लंबित रहने के कारण न्यायिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
बयान में यह भी कहा गया कि सरकारी कर्मचारियों को सेवा आचरण नियमों की मर्यादा में रहकर कार्य करना चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान देने से बचना चाहिए।
