आसनसोल में सफाई संकट गहराया, 8 दिन से हड़ताल, 106 वार्ड कूड़े के ढेर में तब्दील

3 हजार सफाई कर्मियों की हड़ताल से शहर में बदहाली, नगर निगम की चुप्पी पर भाजपा का तीखा हमला

आसनसोन। आसनसोल नगर निगम क्षेत्र में बीते आठ दिनों से जारी सफाई कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने शहर की तस्वीर ही बदल दी है। निगम के सभी 106 वार्डों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और सड़कों से लेकर मोहल्लों तक कूड़े-कचरे के ढेर लग गए हैं। दुर्गंध और गंदगी से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
न्यूनतम वेतन में 15 हजार रुपये की वृद्धि, पहचान पत्र और पीएफ जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर करीब 3000 सफाई कर्मी काम बंद कर आंदोलन पर बैठे हैं। हड़ताल लंबी खिंचने से हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं, लेकिन नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।
शहर में गहराते इस स्वच्छता संकट को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस संचालित नगर निगम बोर्ड पर सीधा हमला बोला है। शनिवार को जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जिला अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य और वरिष्ठ नेता कृष्णेन्दु मुखर्जी ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
देवतनु भट्टाचार्य ने कहा कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और पूरा आसनसोल बदहाली के दौर से गुजर रहा है, लेकिन मेयर से लेकर अधिकारी तक आंख मूंदे बैठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम को न तो जनता की पीड़ा की चिंता है और न ही कर्मचारियों की जायज मांगों की।
वहीं वरिष्ठ नेता कृष्णेन्दु मुखर्जी ने कहा कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण आसनसोल आज कूड़े का शहर बनता जा रहा है। समाधान निकालने के बजाय अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
एक तरफ जहां सफाई कर्मी अपनी मांगों पर अडिग हैं, वहीं दूसरी तरफ बदबू, बीमारियों का खतरा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने शहरवासियों के गुस्से को और भड़का दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है।

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