SIR पर सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की सीधी जिरह, EC को नोटिस

“यह लड़ाई TMC की नहीं, लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की है”
नई दिल्ली/कोलकाता(आकाश शर्मा)| पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच टकराव अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है, जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई।
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल हैं।

खुद कोर्ट में पेश हुईं ममता बनर्जी
सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह दुर्लभ दृश्य रहा, जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने अपनी याचिका पर खुद व्यक्तिगत रूप से अदालत में अपनी बात रखने की अनुमति मांगी।
ममता बनर्जी, वरिष्ठ वकीलों और अपनी कानूनी टीम की मौजूदगी के बावजूद, स्वयं बोलने पर अड़ी रहीं।
उन्होंने पीठ से कहा कि
“मुझे सिर्फ 10 मिनट दे दीजिए, मैं कुछ तथ्य साफ करना चाहती हूं।”

कोर्ट में हल्का-फुल्का पल
जब ममता बनर्जी ने विनम्रता से कहा कि वह उसी राज्य से आती हैं, तो CJI सूर्यकांत ने मुस्कुराते हुए कहा—
“इस पर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए, मैडम।”
यह सुनते ही कोर्टरूम में मौजूद लोग हंस पड़े। ममता बनर्जी ने हाथ जोड़कर अदालत का आभार जताया।

58 लाख वोटरों के नाम हटाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के नाम पर करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।
उनका दावा है कि—कई जीवित लोगों को मृत घोषित किया गया महिलाओं और गरीब तबकों को खास नुकसान हुआ लोगों को अपील का मौका तक नहीं दिया गया उन्होंने इसे मनमाना और अलोकतांत्रिक करार दिया।

“छह पत्र लिखे, एक का भी जवाब नहीं”
ममता बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग को छह बार पत्र लिखा, लेकिन एक भी जवाब नहीं मिला।
उन्होंने सवाल उठाया—
“जब एक निर्वाचित मुख्यमंत्री की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम नागरिकों की सुनवाई कैसे होगी?”

माइक्रो ऑब्जर्वर्स पर गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि
करीब 8300 माइक्रो ऑब्जर्वर्स तैनात किए गए।
कई अधिकारी दूसरे राज्यों से लाए गए।
कई मामलों में Form-6 भरने की अनुमति तक नहीं दी गई
रोल ऑब्जर्वर्स SDM रैंक के भी नहीं हैं।
उनका आरोप है कि प्रक्रिया का इस्तेमाल सिर्फ नाम काटने के लिए किया जा रहा है, जोड़ने के लिए नहीं।

सिर्फ बंगाल को ही क्यों निशाना?”
ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि जब देश के अन्य राज्यों में भी चुनाव होने हैं, तो केवल पश्चिम बंगाल में इतनी जल्दबाज़ी में SIR क्यों कराई जा रही है।उन्होंने कहा कि 24 साल बाद तीन महीने में पूरी प्रक्रिया कराना संदेह पैदा करता है।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
मुख्यमंत्री की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और 9 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।

राजनीतिक हलचल तेज
ममता बनर्जी के इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।जहां विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बता रहा है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई करार दे रही है।

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