कोलकाता, 05 फ़रवरी । पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)
को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने इस मुद्दे पर सदन में किसी भी तरह की चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, क्योंकि मामला फिलहाल उच्चतम न्यायालयमें विचाराधीन है।
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा की मांग करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव 2026 से पहले यह कवायद मतदाताओं के लिए व्यापक उत्पीड़न का कारण बन रही है। लेकिन स्पीकर ने स्पष्ट किया कि चूंकि मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए सदन में इस पर बहस नहीं हो सकती और चर्चा केवल राज्यपाल के अभिभाषण तक सीमित रहेगी।
इस बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सरकार पर बिजनेस एडवाइजरी कमिटी (बीएसी) के फैसले को अंतिम समय में बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुबह बीएसी का जो निर्णय बताया गया था, उसे बाद में बदल दिया गया।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हमें बताया गया था कि एसआईआर पर चर्चा होगी और हम उसी तैयारी के साथ आए थे। अब अचानक इसे बदल दिया गया। स्पीकर को सदन के सामने कार्यसूची रखनी चाहिए।
इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने नियम 169 के तहत एसआईआर के खिलाफ एक प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन प्राप्त था। प्रस्ताव रखते हुए चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण मतदाताओं को परेशान किया गया और इस कवायद से जुड़े तनाव के चलते 107 लोगों की मौत हुई है।
उन्होंने चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले आयोग “उत्पीड़न का आयोग” बन गया है।
हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव को खारिज करते हुए दोहराया कि चूंकि यह मामला शीर्ष अदालत में लंबित है, इसलिए विधानसभा इस पर विचार नहीं कर सकती।
विधानसभा चुनाव में अब तीन महीने से भी कम समय शेष है और ऐसे में एसआईआर का मुद्दा सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच एक बड़ा राजनीतिक टकराव बनकर उभरा है, जिससे सदन के भीतर राजनीतिक तनाव और तेज हो गया है।
