आनंदपुर अग्निकांड : दो और मानव अवशेष बरामद, मृतकों की संख्या हुई 23

कोलकाता, 29 जनवरी । आनंदपुर के नाज़िराबाद इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लापता लोगों की तलाश अब भी जारी है। गुरुवार को जले हुए गोदाम के मलबे से और साक्ष्य जुटाने के लिए प्रशासन ने अर्थ मूवर तैनात किया। राख और जले हुए सामान के ढेर में काफी देर तक खोजबीन के बाद दो और मानव अवशेष बरामद किए गए। इसके साथ ही अब तक मिले शवों की संख्या बढ़कर 23 हो गई हैं।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये सभी अवशेष एक ही व्यक्ति के हैं या अलग-अलग लोगों के। प्रशासन का अनुमान है कि आगे और भी अवशेष मिल सकते हैं। बरामद अवशेषों की पहचान के लिए डीएनए मैपिंग कराने का निर्णय लिया गया है, जिसकी प्रक्रिया गुरुवार से शुरू हो सकती है।

गौरतलब है कि 25 जनवरी की देर रात आनंदपुर के नाज़िराबाद में एक डेकोरेटर्स के गोदाम में आग लग गई थी। आग तेजी से फैलकर पास स्थित मोमो निर्माण इकाई तक पहुंच गई। 27 जनवरी को आग पर काबू पाया गया, जबकि पॉकेट फायर को धीरे-धीरे बुझाया गया। इस हादसे में 20 से अधिक लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। अब तक 28 परिवारों ने अपने परिजनों के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई है।

आरोप है कि गोदाम में पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था नहीं थी। इस मामले में गोदाम के मालिक गंगाधर दास को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। उधर, अपने परिजनों की कोई खबर न मिलने से लापता लोगों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। नए अवशेषों की बरामदगी ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।

इस घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को घटनास्थल पर जाने का ऐलान किया था। हालांकि, उससे पहले घटना वाले इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बुधवार आधी रात से भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 (पूर्व में आईपीसी की धारा 144) लागू कर दी गई।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आग की घटना के 32 घंटे बाद दमकल मंत्री सुजीत बोस के मौके पर पहुंचने पर भी सवाल उठते हैं। शुभेंदु अधिकारी का आरोप है कि धारा 163 को सच्चाई दबाने और उन्हें घटनास्थल पर जाने से रोकने के लिए लागू किया गया है। उनके अनुसार, 28 जनवरी शाम 5 बजे से 30 मार्च तक दुर्घटनास्थल के 100 मीटर के दायरे में पांच से अधिक लोगों के जुटने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

हालांकि, सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि इस समय प्राथमिकता आग बुझाने और राहत एवं बचाव कार्य को दी जा रही है, न कि राजनीति को

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